भारतीय पुरातत्व के पिता किसे कहा जाता है?

भारतीय पुरातत्व के पिता किसे कहा जाता है?

भारतीय पुरातत्व विभाग आज के समय विश्व के सभी पुरातत्व विभाग में सम्मिलित और सबसे सर्वोत्तम विभाग माना जाता है। भारतीय पुरातत्व विभाग ने भारत में कई ऐसे महानतम खोज की है जैसे कि महाभारत, तथा रामायण से संबंधित तथ्यों की विभिन्न प्रकार की खोज करी है।

इसके अलावा शिव पुराण तथा और भी अधिक प्राचीनतम ग्रंथों और पुरातात्विक सर्वेक्षणों से सम्बंधित तथ्यों की खोज के द्वारा भारतीय पुरातत्व विभाग एक विशेष विभाग में चुका है, जो कि आज के समय काफी चर्चा में भी रहता है।

जैसा कि हम जानते हैं कि आज के समय खबरों में बनी हुई ज्ञानवापी मस्जिद का मामला भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश से भारतीय पुरातत्व विभाग के सर्वेक्षण के आधार पर सुलझाया जा रहा है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसी Bhartiya puratatva ka pita kise kaha jata hai? यदि नहीं जानते तो कोई बात नहीं, क्योंकि आज हम आपको बताने वाले हैं कि Bhartiya puratatva ka pita kise kaha jata hai और भारतीय पुरातत्व विभाग की शुरुआत कब हुई थी। तो चलिए आज का ये लेख शुरू करते हैं –

भारतीय पुरातत्व विभाग क्या है? | bhartiya puratatva vibhag kya hai

भारतीय पुरातत्व विभाग, भारत सरकार के अंतर्गत आने वाली है एक ऐसी संस्था या विभाग है जिसका मुख्य उद्देश्य और कार्य पुरातात्विक अनुसंधान और भारतीय सांस्कृतिक ऐतिहासिक स्मारकों का संरक्षण और सर्वेक्षण करना है।

यह मूल रूप से भारतीय ऐतिहासिक स्मारकों के प्रति अनुसंधान करने के लिए बनाई गई है, और भारत में पाए जाने वाली किसी भी पुरातात्विक तत्व की खोज करने के लिए इसका जन्म हुआ था।

भारतीय पुरातत्व विभाग की स्थापना कब हुई?

भारतीय पुरातत्व विभाग की स्थापना1861 हुई थी और इसकी स्थापना सबसे पहले अलेक्जेंडर कनिंघम ने की थी। अलेक्जेंडर कनिंघम ने इस विभाग के महानिदेशक के तौर पर काम किया, और इसके पहले महानिदेशक बने।

सन 1861 में ही यह इतिहास का पहला ऐसा व्यवस्थित शोध करने वाला पुरातात्विक विभाग बना जिसे एशियाटिक सोसाइटी के द्वारा पहचान प्राप्त हुई। अलेक्जेंडर कनिंघम को भारतीय पुरातत्व विभाग का पिता कहा जाता है। एशियाटिक सोसाइटी की स्थापना 15 जनवरी 1784 को ब्रिटिश इंडोलॉजिस्ट के द्वारा की गई थी।

जिसका नाम विलियम जॉन्स था भारतीय पुरातात्विक अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए अलेक्जेंडर कनिंघम ने संस्कृत और फारसी ग्रंथों के अध्ययन को बढ़ावा दिया था, जिसका उद्देश्य उन में लिखे गए और बताए गए ऐसे विशेष स्थान थे, जो कि पुरातात्विक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण थे।

इसी बीच एक वार्षिक पत्रिका भी विलियम जोंस के द्वारा प्रकाशित की गई जिसका शीर्षक एशियाई अनुसंधान था। इसके 1 सदस्य का नाम चार्ल्स विलकिंस भी था, जिन्होंने 1785 में भगवत गीता का पहला अंग्रेजी अनुवाद किया था, और बंगाल के गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग के द्वारा इसका प्रकाशन करवाया गया था।

भारतीय पुरातत्व के पिता अलेक्जेंडर कनिंघम कौन थे? | Bhartiya puratatva ka pita kise kaha jata hai?

Bhartiya puratatva ka pita kise kaha jata hai?

अलेक्जेंडर कनिंघम मूल रूप से एक पुरातात्विक सर्वेक्षण से जुड़े हुए व्यक्ति थे, जो कि शौकिया तौर पर पुरातात्विक विद्वानों के साथ विभिन्न प्रकार के स्थानों पर पुरातात्विक शोध करते थे। इनके गुरु का नाम जेम्स प्रिंसेप था, और इन्हें ब्राम्ही का गहरा ज्ञान था।

इन्होंने बहुत सारे स्मारकों पर विस्तृत सर्वेक्षण भी किया था और भारत में अलेक्जेंडर कनिंघम ने बौद्ध स्तूपों की खुदाई भी की थी, और भारत की लंबाई चौड़ाई का पता लगाने के साथ-साथ भारत के कुछ महत्वपूर्ण स्थलों का सर्वेक्षण भी जेम्स कनिंघम ने किया।

अलेक्जेंडर कनिंघम का जन्म 23 जनवरी 1814 को हुआ था इनका जन्म लंदन के शहर में हुआ था, और लंदन में ही 28 नवंबर 1893 को इनकी मृत्यु हुई थी।

यह बंगाल के इंजीनियर समूह में एक ब्रिटिश सेना के इंजीनियर थे, और एक समय के पश्चात उन्होंने पुरातात्विक की भाषाओं में रुचि दिखाई सन 1861 में इन्हें भारत सरकार के अंतर्गत पुरातात्विक विभाग में सर्वेक्षण करता के नवनिर्मित पद पर नियुक्त किया गया था, और इन्होंने अपनी मेहनत और लगन से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को मजबूत बनाया।

इन्होंने अपने जीवन काल में कई किताबें लिखी और मोनोग्राफ भी लिखे थे, साथ ही उन्होंने कलाकृतियों का एक व्यापक संग्रह भी किया था। इनके द्वारा कई व्यापक संग्रह आज के समय ब्रिटिश संग्रहालय में सुरक्षित रखे गए हैं।

साथ ही आपको बता दें की अलेक्जेंडर कनिंघम महान गणितज्ञ एलन कनिंघम के पिता भी थे। अलेक्जेंडर कनिंघम को मूल रूप से इंजीनियर और एक पुरातत्वविद के तौर पर जाना जाता था। इनकी पत्नी का नाम एलीशिया मारिया था। इनके दो बच्चे भी थे, जिनका नाम एलेन कनिंघम तथा सर एलेग्जेंडर एफ।डी। कनिंघम था। इनके पिता का नाम एलेन कनिंघम तथा माता का नाम जीन वॉकर था।

निष्कर्ष

आज के लेख में हमने जाना कि Bhartiya puratatva ka pita kise kaha jata hai?, और साथ ही हमने यह भी जाना कि भारतीय पुरातत्व विभाग के इतिहास के बारे में भी जानकारी प्राप्त की है। हम आशा करते हैं कि आज का यह लेख आपके लिए काफी ज्ञानवर्धक रहा होगा। अगर आप कोई सवाल पूछना चाहते हैं तो कमेंट बॉक्स में कमेंट कर सकते हैं।

FAQ

भारतीय पुरातत्व का पिता कौन है? | bhartiya puratatva ke janak kaun hai

अलेक्ज़ैंडर कन्निघम

भारतीय पुरातत्व विभाग के अध्यक्ष कौन थे?

सही उत्तर विकल्प 2 यानी एलेक्जेंडर कनिंघम है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण संस्कृति मंत्रालय से जुड़ी एक भारतीय सरकारी एजेंसी है जो पुरातात्विक अनुसंधान और देश में सांस्कृतिक स्मारकों के संरक्षण और रखरखाव के लिए जिम्मेदार है। इसकी स्थापना 1861 में अलेक्जेंडर कनिंघम ने की थी जो इसके पहले महानिदेशक भी बने।

भारत में पुरातत्व विभाग की स्थापना किसने की?

एएसआई की स्थापना 1861 में अलेक्जेंडर कनिंघम ने की थी, जो इसके पहले महानिदेशक बने।

भारत में पुरातत्व का विकास कैसे हुआ?

पुरातत्व का इतिहास पश्चिमी यूरोप में शुरू हुआ, और भारतीय उपमहाद्वीप के पुरातत्व में रुचि रखने वाले शुरुआती विद्वान 16वीं, 17वीं और 18वीं शताब्दी की शुरुआत में पश्चिमी यूरोपीय यात्री थे। भारत में कुछ उल्लेखनीय पुरातात्विक स्थलों में भारत के हरियाणा राज्य में स्थित एक पुरातात्विक स्थल राखीगढ़ी शामिल है।