उज्जैन में कोई राजा रात क्यों नहीं रुकता है?

नमस्कार दोस्तों, आपने उज्जैन के बारे में तो जरूर सुना होगा जिसके बारे में यह कहा जाता है कि उसका राजा रात में वहां पर नहीं रुकता है। दोस्तों क्या आप जानते हैं कि उज्जैन में कोई राजा रात क्यों नहीं रुकता हैं। यदि आपको इस सवाल का जवाब मालूम नहीं है, तथा आप इसके बारे में जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको इसके बारे में संपूर्ण जानकारी देने वाले हैं।

उज्जैन में कोई राजा रात क्यों नहीं रुकता है?

जैसा कि दोस्तों आप सभी लोग जानते हैं, कि उज्जैन में कोई राजा रात के समय नहीं रुकता है, इसके पीछे कि यह काफी इंटरेस्टिंग कहानी है, जिसके बारे में हमने आपको यहां पर बताया है।

यदि आपने इतिहास पढ़ा है या फिर आप इतिहास के अंतर्गत अपनी रूचि रखते हैं तो आपको पता होगा कि उज्जैन के राजा विक्रमादित्य थे, तथा विक्रमादित्य के राजा बनने से पहले ही यह फायदा काफी ज्यादा प्रसिद्ध हो चुकी थी कि जो भी राजा बनेगा, उसकी मृत्यु होनी निश्चित है। लेकिन राजा विक्रमादित्य ने इस प्रथा को समाप्त कर दिया था।

विक्रमादित्य ने कहा था, यदि राज्य की गद्दी खाली भी हो जाती है तो शासन उसी के नाम से चलने वाला है।

तो दोस्तों ही है पर था आज तक चली आ रही है यानी कि लोग आज भी इस प्रकार के अंतर्गत विश्वास रखते हैं, तो ऐसे में उज्जैन के अंतर्गत कोई भी राजा रात्रि समय के अंतर्गत नहीं रुकता है, जिसके अंतर्गत हमारे देश का कोई भी मुख्यमंत्री कोई भी प्रधानमंत्री उज्जैन के अंतर्गत रात्रि समय में नहीं रुकता है।

मान्यताओं के अनुसार उज्जैन का राजा सिर्फ महाकाल है, इसके अलावा किसी को भी इस गद्दी का अधिकार नहीं है।

महाकालेश्वर मंदिर के पीछे की कहानी क्या है?

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दोस्तों महाकालेश्वर उज्जैन के अंतर्गत स्थित भगवान शिव का मंदिर है, तो ऐसे मे वहां के लोग यह मानते हैं, इसके अलावा पूरी दुनिया के अलग-अलग लोग यह मानते हैं कि उज्जैन के अंतर्गत महाकाल एक राजा के रूप में विराजमान हैं, तो ऐसे में कोई भी दूसरा व्यक्ति वहां का राजा नहीं बन सकता है, क्योंकि वहां के राजा भगवान शिव यानी कि महाकाल है।

जिस समय महाकाल उज्जैन के राजा के रूप में विराजित हुए थे उसके बाद से उज्जैन का कोई भी राजा नहीं हुआ है, उज्जैन के अंतर्गत है में केवल शासक देखने को मिलते हैं ,वह भगवान शिव की पौराणिक कथाओं के अनुसार उज्जैन के अंतर्गत निवास भी नहीं करते हैं।

इसके अलावा यदि कोई भी मंत्री या फिर कोई भी राजा यहां पर रात्रि समय के अंतर्गत रुकता है, कि अभी ठहरता है तो उसको सजा का भुगतान करना पड़ता है।

निष्कर्ष

तो दोस्तों इस पोस्ट के माध्यम से आपने जाना कि उज्जैन में कोई राजा रात क्यों नहीं रुकता है (ujjain mein koi raja raat kyon nahi rukta), तथा महाकालेश्वर मंदिर के पीछे की कहानी क्या है । हमें उम्मीद है कि आपको हमारे द्वारा दी गई यह इंफॉर्मेशन पसंद आई है, तो आपको इस पोस्ट के माध्यम से कुछ नया सीखने को मिला है।

महाकाल मंदिर के सामने से बारात क्यों नहीं निकलती?

महाकाल मंदिर के सामने से कोई जुलूस नहीं निकलता क्योंकि बाबा के सामने कोई घोड़े पर सवार नहीं हो सकता।

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