मौलिक अधिकार किसे कहते हैं, मानव अधिकार के प्रकार

मौलिक अधिकार मानव जीवन के लिए बहुत ही जरूरी होता है क्योंकि इसके बिना कोई भी माना ना तो अपने व्यक्तित्व का विकास कर पाता है और ना ही समाज के लिए उपयोगी कार्य कर पाता है। मानव अधिकार ऐसी शक्ति है जो सभी मानव के गरिमा को बनाए रखती है। मानव अधिकार के अंदर ही मौलिक अधिकार भी आता है।

आपने मौलिक अधिकार के बारे में तो कई बार सुना होगा लेकिन क्या आप मानव अधिकार के बारे में जानते हैं? यदि नहीं तो इस लेख को पूरा जरूर पढ़ें। आज के इस लेख के माध्यम से हम आपको, मौलिक अधिकार किसे कहते हैं? मानव अधिकार किसे कहते हैं ? मानव अधिकार के प्रकार, के बारे में जानकारी देने वाले हैं।

मानवाधिकार का अर्थ

मानवाधिकार का अर्थ है अधिकार जो किसी भी राष्ट्र में रह रहे सभी मनुष्य को प्राप्त होता है। यह अधिकार देश में रह रहे वयस्कों, बच्चों, स्त्रियों, बूढ़ों सभी को प्राप्त है। ऐसी अधिकार जो मानव की गरिमा को बनाए रखते हैं, मानवाधिकार कहलाते हैं।

मानव अधिकार की परिभाषा

अनेक विद्वानों ने मानवाधिकार की अलग-अलग परिभाषाएं दी है जो कि इस प्रकार है –

हंट के अनुसार, “मानवाधिकार मानवीय विचारों की स्वतंत्रता भी व्यक्ति है जो सैद्धांतिक अभी मूल्यों की आधारशिला है। जिससे मानव उन्नति के शिखर पर अग्रसर होता है।”

श्रीनिवास शास्त्री के अनुसार, “अधिकार समुदाय के कानून द्वारा स्वीकृत वह व्यवस्था नियम अथवा रीति है जो नागरिक के सर्वोच्च नैतिक कल्याण में सहायक हो।”

मानव अधिकार के प्रकार

मानव अधिकारों को कुल पांच भागों में बांटा गया है:-

  1. सिविल अधिकार
  2. राजनीतिक अधिकार
  3. आर्थिक अधिकार
  4. सामाजिक अधिकार
  5. सांस्कृतिक अधिकार

1. सिविल अधिकार

सिविल अधिकार को हम नागरिक अधिकार भी करते हैं यह लोकतंत्र का एक अनिवार्य घटक है। यह जाति या धर्म की परवाह किए बिना सामान सामाजिक अवसरों और कानून के तहत सुरक्षा की गारंटी देते हैं। जब लोगों को यह लगता है कि उन्हें प्राप्त सिविल अधिकारों के अनुसार उनके लिए कार्य नहीं किया जा रहा है तो मानव को इसके लिए आवाज उठाने का भी अधिकार है।
सिविल अधिकार के अंतर्गत मानव के लिए कई अधिकारों को प्राथमिकता दी गई है जो निम्न प्रकार से है –

जीवन का अधिकार
स्वतंत्रता और सुरक्षा के विरुद्ध अधिकार
दासता के विरुद्ध अधिकार
कानून के समक्ष समानता का अधिकार
यातना के विरुद्ध अधिकार
विचार, अंतरात्मा व धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार

2. राजनीतिक अधिकार

राजनीतिक अधिकार व अधिकार होते हैं जिसमें बिना भेदभाव या बिना डर के समाज और देश के नागरिकों को राजनीति में भाग लेने का अधिकार होता है। इस अधिकार में देश के नागरिकों को मतदान करने का अधिकार भी प्राप्त है साथ ही राजनीति के संबंध में अपने विचार प्रकट करने के अधिकार को भी शामिल किया गया है।

राजनीतिक अधिकार में देश के नागरिकों को राजनीति में निर्वाचन करने का भी अधिकार प्राप्त है। राजनीतिक अधिकार के अनुसार मानव राजनीतिक दल में शामिल भी हो सकता है साथ ही राजनीतिक रैलियों, कार्यक्रमों में भी शामिल हो सकता है।
देश की राजनीति में मानव को कई अधिकार प्राप्त हैं जोकि निम्न है –

मताधिकार, निर्वाचित होने का अधिकार
विचार प्रकट करने का अधिकार
संगठन बनाने की स्वतंत्रता का अधिकार
कानून के समक्ष समानता का अधिकार
शांतिपूर्ण समूह बनाने का अधिकार

3. आर्थिक अधिकार

आर्थिक अधिकार वह होता है जिसमें नागरिकों को उनके मुताबिक धन कमाने का अधिकार प्राप्त होता है। इस अधिकार में देश का नागरिक किसी भी तरह के व्यवसाय को कर सकता है जो कानूनी रूप से मानने हो। आर्थिक अधिकार में देश के सभी लोगों को काम पाने का भी अधिकार है यदि कोई ऐसा व्यक्ति है जिसे नौकरी नहीं मिल पा रही है तो सरकार का कर्तव्य है कि उस व्यक्ति को भी नौकरी मिल पाए। आर्थिक अधिकार में मानव को काम करने के साथ-साथ छुट्टी पाने का भी अधिकार होता है।
आर्थिक अधिकारों में भी मानव के लिए निम्न प्रकार के अधिकारों को शामिल किया गया है।

श्रमिक संघ बनाने का अधिकार
कार्य करने का अधिकार
न्यायपूर्ण कार्यदशा का अधिकार
व्यवसाय चुनने का अधिकार

4. सामाजिक अधिकार

सामाजिक अधिकार में उन सभी अधिकारों को शामिल किया गया है जो एक समाज को मिलनी चाहिए। यदि आप किसी समाज में रहते हैं तो आपको शिक्षा पाने का भी अधिकार है साथ ही आपको चिकित्सा संबंधी सुविधाएं प्राप्त करने का भी अधिकार प्राप्त होता है। सामाजिक अधिकार में अपने परिवार बनाने का भी अधिकार है लेकिन इसके लिए यह शर्त है कि आपको समाज में शांतिपूर्ण तरीके से व्यवहार करना है।
मानव अधिकार के प्रकार में सामाजिक अधिकार भी शामिल हैं जो कि निम्न प्रकार से है –

शिक्षा का अधिकार
उचित जीवन स्तर का अधिकार
सामाजिक सुरक्षा व सामाजिक बीमे का अधिकार
शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का अधिकार

5. सांस्कृतिक अधिकार

सांस्कृतिक अधिकार में नागरिकों को वह सभी अधिकार प्राप्त हैं जो एक मानव को प्राप्त होना चाहिए। किसी भी मानव को अपने मन मुताबिक किसी भी संस्कृति को चुनने का अधिकार है और पूजा पाठ करने का भी अधिकार प्राप्त है। सांस्कृतिक अधिकार में सभी व्यक्ति अपने अपने धर्मों के अनुसार सांस्कृतिक कार्यक्रम भी कर सकते हैं।
मानव अधिकार को सांस्कृतिक अधिकार भी प्राप्त है इसमें कई अन्य अधिकारों को शामिल किया गया है –

साहित्यिक रचनाकार को उसका लाभ लेने का अधिकार
सांस्कृतिक जीवन में भाग लेने का अधिकार
वैज्ञानिक प्रगति का लाभ लेने का अधिकार

मौलिक अधिकार किसे कहते हैं?

मौलिक अधिकार का वर्णन भारत के संविधान के भाग तीन में किया गया है। मौलिक अधिकार ऐसे अधिकार है जो भारतीय नागरिकों को प्रदान किए गए हैं। एक अधिकारों की व्याख्या भारतीय संविधान में विस्तृत एवं व्यापक रूप से की गई है। भारत का यह संविधान संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान से लिया गया है। मौलिक अधिकार के अनुच्छेद में कुल 12 से 35 मौलिक अधिकारों का उल्लेख किया गया है।

मौलिक अधिकार के प्रकार

मौलिक अधिकारों को भी कई भागों में वर्गीकृत किया गया है। मौलिक अधिकारों में पहले कुल 6 अधिकारों को शामिल किया गया था जिसमें संपत्ति के अधिकार को शामिल किया गया था। 1978 में संपत्ति के अधिकार को हटाकर मौलिक अधिकारों में केवल 5 अधिकार को ही प्राथमिकता दी गई है।

  • समता का अधिकार
  • स्वतंत्रता का अधिकार
  • शोषण के विरुद्ध अधिकार
  • धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार
  • संस्कृति और शिक्षा का अधिकार

निष्कर्ष

आज के इस लेख में हमने आपको मानवाधिकार एवं मानव अधिकार के प्रकार के बारे में जानकारी दी। साथ ही बताया कि मौलिक अधिकार किसे कहते हैं? उम्मीद है कि आपको अधिकारों से संबंधित सही जानकारियां मिल पाई होंगी। यदि आपको यह लेख पसंद आया हो तो अपने दोस्तों के साथ जरूर साझा करें।

FAQ

मौलिक अधिकार किसे कहते हैं और कितने हैं?

मौलिक अधिकार वास्तव में व्यक्तियों की रक्षा करते हैं और अल्पसंख्यक समुदायों को भेदभाव, राज्य की कार्रवाई और पक्षपात से संरक्षित किया जाता है। व्यक्तियों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए संविधान में तीन अनुच्छेद बनाए गए हैं।

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