पित्त की थैली का ऑपरेशन का खर्चा कितना आता है?

पित्त की थैली का ऑपरेशन का खर्चा कितना आता है?

नमस्कार पाठको, आज के हमारे इस लेख का विषय है पित्त की थैली का ऑपरेशन का खर्चा। यदि आप भी पित की थैली के ऑपरेशन से संबंधित जानकारी को खोज रहे हैं तो आप बिल्कुल सही जगह पर आए हैं। इस लेख के माध्यम से हम आपको बताने वाले हैं कि नीजि या सरकारी हॉस्पिटल में पित्त की थैली का ऑपरेशन करवाने में कितना खर्च आता है और साथ ही इस ऑपरेशन का प्रोसीजर किस तरह रहता है इस जानकारी से भी आपको अवगत करवाएंगे। तो चलिए शुरू करते हैं:-

पित्त का ऑपरेशन क्या है?

पित्ताशय की थैली को किसी गंभीर रोग की वजह से, सर्जरी करके हटाना, पित्त का ऑपरेशन कहलाता है। इस सर्जरी को मेडिकल भाषा में कोलेसिस्टेक्टोमी (cholecystectomy) कहते हैं। यह एक नॉर्मल सर्जरी होती है। इस सर्जरी में कॉम्प्लिकेशन बहुत ही कम होते हैं। इस सर्जरी के माध्यम से गॉलब्लैडर को निकाल दिया जाता है।

पित्त का ऑपरेशन किस कारण से किया जाता है?

यदि आपके पिताशय में बार-बार पथरी बन रही हो या फिर कोई अन्य गंभीर विकार हो जाए, यहाँ गंभीर विकार का अर्थ है ऐसी समस्या जो किसी  भी दवाई से ठीक ना हो रहा हो या किसी अन्य थेरेपी से भी ठीक करना मुश्किल हो जाए, तो इस स्थिति में पित्ताशय की थैली यानी गॉलब्लैडर को ऑपरेशन के द्वारा निकालना पड़ता है।

एक सर्वे के अनुसार भारत की कुल आबादी में से 12% लोगों में मूत्र पथरी होने की आशंका है, जिसमें से 50% आबादी के गुर्दे खराब होने के चांसेस रहते हैं। यह समस्या ज्यादातर उत्तर भारत की आबादी में पाई गई है और महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में यह समस्या अधिक है।

पित्ताशय की थैली में पित्त रस बनता है जो खाना पचाने में सहायक होता है परंतु यदि गॉलब्लैडर  में कोई गंभीर समस्या पैदा हो जाए तो अक्सर डॉक्टर गॉलब्लैडर को निकालने की सलाह देते हैं।

पित्त की थैली से संबंधित बीमारियां

pit ki thaili ka operation ka kharcha

पित्ताशय में होने वाली सबसे आम बीमारी पथरी है। जब मिनरल और नमक ठोस रूप में जम जाते हैं तो यह पथरी कहलाते हैं। यह रेत के दाने जितने छोटे भी हो सकते हैं या फिर गोल्फ की गेंद जितने बड़े भी हो सकते हैं।

पथरी की वजह से पित्त की थैली में सूजन की समस्या हो सकती है।

पित्ताशय में किसी तरह के संक्रमण से संबंधित बीमारी भी हो सकती है।

यदि पित्ताशय में बनने वाला पित्त रस बहुत गाड़ा बन रहा हो या वह ठीक तरह से बाहर ना निकल रहा हो, तो यह भी गंभीर बीमारियों को जन्म देता है।

डॉक्टर गॉलब्लेडर निकालने की सलाह कब देते हैं?

यदि गॉलब्लेडर में लंबे समय से कोई समस्या हो या फिर कोई गंभीर समस्या पैदा हो जाए या फिर गॉलब्लेडर की वजह से शरीर में दिक्कत आ रही हो, जो दवा लेने के बाद भी ठीक ना हो रही हो, तो इस स्थिति में डॉक्टर पित्ताशय की थैली को निकालने की सलाह देते हैं।

किसकी यह सर्जरी नहीं की जाती?

कोई भी पेशेंट जिसको नीचे लिखी समस्याओं में से कोई भी समस्या हो, तो डॉक्टर सर्जरी की सलाह नही देते हैं।

  • ऐसे पेशेंट जो लीवर रोग की लास्ट स्टेज में है।
  • जिन पेशेंट में रक्त स्राव संबंधी विकार हो।
  • जिन पेशेंट के पित्ताशय की दीवार सख्त हो।
  • जिन पेशेंट में इनवेसिव गॉलब्लैडर कार्सिनोमा हो।
  • जो पेशेंट मिरिजी सिंड्रोम टाइप 2 से ग्रसित हो।
  • ऐसे पेशेंट जो जनरल एनएसथीसिया को सहन नहीं कर सकते।

पिताशय की थैली हटाने की सर्जरी का प्रोसीजर क्या होता है?

सबसे पहले कुछ टेस्ट किये जाते है, जिनमें ब्लड टेस्ट और गॉलब्लेडर के इमेजिंग टेस्ट शामिल है।

  1. मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री ली जाती है।
  2. ऑपरेशन से कुछ घंटे पहले कुछ भी खाने या कुछ भी पीने के लिए नहीं कहा जाता है।
  3. सर्जरी करने से ठीक पहले मरीज को एनेस्थीसिया दिया जाता है जिससे मरीज ऑपरेशन के दौरान बेहोश रहता है।
  4. पित्त की थैली का ऑपरेशन दो प्रकार की सर्जरी से किया जाता है। कौन से मरीज के लिए किस तरह की सर्जरी सही होगी, यह मरीज की स्थिति के आधार पर सर्जन डिसाइड करते हैं।

ओपन कोलेसिस्टेक्टोमी – इसमें पेशेंट के पेट पर पसलियों के नीचे से कट लगाकर गॉलब्लैडर निकालने का प्रोसीजर किया जाता है।

लेप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टोमी – इस सर्जरी में सर्जन पेट पर चार छोटे चीरे लगाते हैं और एक कैमरा लगी ट्यूब को पेट के अंदर डालते है। कैमरे की मदद से सर्जन वीडियो मॉनिटर करते हैं और पित की थैली की स्थिति मालूम करते हैं। स्थिति फाइनल हो जाने पर सर्जन, सर्जिकल उपकरणों की सहायता से पित्त की थैली को निकाल देते हैं।

ऑपरेशन के बाद precautions जरूर लें

  • दो हफ्तों तक कोई भी कठिन शारीरिक कार्य न करें।
  • डॉक्टरी guidance से ही घाव वाली जगह को साफ करें ताकि संक्रमण से बचा जा सके।
  • ऑपरेशन के कुछ दिनों बाद तक तरल पदार्थ ही खाएं।
  • पानी उचित मात्र पिएँ।
  • सर्जरी के बाद पाचन ठीक रहे इसके लिए उचित मात्रा में फाइबर ले।
  • कोई भारी वजन ना उठाएं।
  • घाव वाली जगह को हाथ लगाने से पहले हाथों को जरूर धोएं।
  • ढीले कपड़े पहने।

पित्त की थैली निकालने के नुकसान क्या होता है?

हर ऑपरेशन के बाद कुछ ना कुछ समस्याएं आते ही है। सर्जरी हो जाने के बाद इंफेक्शन, बुखार या फिर ब्लीडिंग होना आम है। पित की थैली निकालने के बाद खाना पचाने में कुछ समस्याएं आ सकती है। जैसे:-

  • खाना पचाने में दिक्कत हो सकती है।
  • खाना सही से ना पचने के कारण दस्त या पेट फूलने की समस्या हो सकती है।
  • सर्जरी की वजह से कुछ समय तक कब्ज की समस्या रह सकती है।
  • गॉलब्लैडर निकालने की सर्जरी के दौरान सर्जन से by mistake आंतों को नुकसान पहुंच सकता है।

पित्त की थैली का ऑपरेशन का खर्चा कितना आता है?

तो चलिए अब इस लेख के महत्वपूर्ण प्रश्न के सवाल पर चर्चा करते हैं की पित्त की थैली के ऑपरेशन में कितना खर्च आता है? आपको बता दें कि यदि आप किसी प्राइवेट हॉस्पिटल से गॉलब्लैडर का ऑपरेशन करवाते हैं तो खर्चा लगभग 20,000 से 40000 तक आता है और सरकारी हॉस्पिटल में पित्त की थैली को हटाने की सर्जरी यानी लेप्रोस्कॉपी सर्जरी मुफ्त की जाती है।

निष्कर्ष

आशा है या आर्टिकल आपको बहुत पसंद आया हुआ इस आर्टिकल में हमने बताया (पित्त की थैली का ऑपरेशन का खर्चा कितना आता है?) के बारे मे संपूर्ण जानकारी देने की कोशिश की है अगर यह जानकारी आपको अच्छी लगे तो आप अपने दोस्तों के साथ भी Share कर सकते हैं अगर आपको कोई भी Question हो तो आप हमें Comment कर सकते हैं हम आपका जवाब देने की कोशिश करेंगे।

FAQ

पित्त की थैली का दूरबीन वाला ऑपरेशन कैसे होता है?

पित्ताशय की थैली को हटाने का सबसे आम तरीका टेलीस्कोपिक सर्जरी है। एक कैमरा, जिसे लैप्रोस्कोप के रूप में जाना जाता है, जो तीव्र प्रकाश के स्रोत से जुड़ा होता है, आपकी नाभि में बने एक छोटे से चीरे के माध्यम से शरीर के अंदर डाला जाता है। शरीर के अंदर सर्जिकल उपकरणों को डालने के लिए तीन छोटे छेद किए जाते हैं।

पित्त की थैली निकलने के बाद क्या दिक्कत होती है?

एक्सपर्ट का जवाब: गॉल ब्लैडर यानी पित्ताशय की पाचन क्रिया में अहम भूमिका होती है। यह लीवर से आने वाले पित्त (पाचन रस) को स्टोर करता है, लेकिन सर्जरी के बाद लीवर से पित्त सीधे छोटी आंत में चला जाता है। इससे लीवर और उसके बीच की प्रक्रिया में कुछ समय के लिए समस्या हो सकती है। रोगी को अतिसार भी हो जाता है।

ऑपरेशन के बाद कितने दिन ठीक होता है?

विशेषज्ञों का कहना है कि सर्जरी के बाद तेजी से ठीक होने और रिकवरी सुनिश्चित करने के लिए सर्जनों को छह सप्ताह के ठीक होने के बाद ही एक कोविड रोगी पर एक अनावश्यक सर्जरी करने पर विचार करना चाहिए।

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