संविधान सभा के प्रारूप समिति के अध्यक्ष कौन थे?

संविधान सभा के प्रारूप समिति के अध्यक्ष कौन थे?

मित्रों, भारत का संविधान पूरी दुनिया में सबसे बड़ा संविधान माना जाता है, और इस संविधान को प्राप्त करने के लिए भारत ने अंग्रेजों से आजादी प्राप्त की, तथा भारत में लोकतंत्र की स्थापना का मूल चित्रण भारतीय संविधान भली-भांति करता है।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि Samvidhan ka nirmaan Kaise hua? और भारतीय संविधान सभा क्या है भारतीय Samvidhan Sabha ke Prarup Samiti ke Adhyaksh Kaun the?

यदि आप नहीं जानते तो कोई बात नहीं क्योंकि आज हम आपको विस्तार से इन सब के बारे में जानकारी देने वाले हैं चलिए शुरू करते हैं-

संविधान सभा के बारे में संविधान सभा का निर्माण

Samvidhan Sabha ke Prarup Samiti ke Adhyaksh Kaun the

मित्रों संविधान सभा का निर्माण नवंबर 1946 को किया गया था, लेकिन इसका पहला विचार एम।एन। रॉय के द्वारा सन 1934 में ही प्रस्तावित किया गया था, जो कि उस समय कट्टरपंथी लोकतंत्र के समर्थक थे। इसके पश्चात यह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की एक मूल मांग भी बन गई। भारत सरकार अधिनियम 1935 को पूर्ण रूप से खारिज कर दिया, जो कि भारतीयों के इच्छा के विरुद्ध थी।

हालांकि सी राजगोपालाचारी ने 15 नवंबर 1939 को वयस्क मताधिकार के आधार पर एक संविधान सभा की प्रस्तावना करी जिसे 1940 में अंग्रेजों के द्वारा स्वीकार किया गया।

भारत, भारतीय संविधान का मसौदा भारतीय लोगों के द्वारा मिलकर तैयार करना चाहता था। हालांकि सन 1935 में जो भारत सरकार अधिनियम पारित किया गया था वह अंग्रेजों के द्वारा बनाया गया था।

लेकिन इसके पश्चात, 16 मई 1946 को कैबिनेट मिशन योजना के तहत भारत की संविधान सभा को तैयार किया गया, और इसमें प्रांतीय विधानसभाओं से “एकल हस्तांतरणीय वोट” के द्वारा प्रतिनिधियों को चुना गया।

कुल मिलाकर 389 सदस्यों की सदस्यता संविधान सभा की रही इसमें से 292 में तो प्रांतों के प्रतिनिधि थे, तथा 93 रियासतों के प्रतिनिधि थे, और 4 दिल्ली, अजमेर, मेरवाड़ा, कूर्म तथा ब्रिटिश बलूचिस्तान के मुख्य प्रांतों में से थे।

पाकिस्तान का पैदा होना

इन सब में हम पाकिस्तान के पैदा होने को नहीं भूल सकते, क्योंकि तकरीबन 296 सीटों का चुनाव सन 1946 तक पूरा हो गया था, और यहां कांग्रेस ने 208 सीटें जीती और मुस्लिम लीग ने 73 सीट जीती थी।

लेकिन इसके पश्चात मुस्लिमों की रहनुमाई कर रहे मोहम्मद अली जिन्ना ने भारत में ही मुसलमानों के लिए एक अलग संविधान सभा की मांग की, जिसे कांग्रेस ने सहयोग देने से मना कर दिया।

इसके पश्चात मोहम्मद अली जिन्ना ने धर्म के नाम पर भारत के सभी मुसलमानों को भड़काना शुरू किया और भड़के हुए मुसलमानों ने हिंदुओं को मारना शुरू किया। इसके पश्चात भारत में हिंदू-मुस्लिम दंगों का एक ऐसा इतिहास शुरू हुआ जो आज के समय तक चला आ रहा है।

भारत में 18 जुलाई 1947 को भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम पारित किया गया था, जिसके पश्चात पाकिस्तान के अलग राष्ट्र बनने की घोषणा भी माउंटबेटन योजना के तहत की गई। इसमें मुसलमानों के लिए अलग संविधान सभा की स्थापना की गई, और साथ में भारतीय संविधान सभा का पुनर्गठन किया गया।

भारतीय संविधान सभा में विभिन्न प्रकार के जाति क्षेत्र धर्म लिंग आदि के आधार पर 299 प्रतिनिधियों के द्वारा संविधान का मसौदा यानी कि संविधान का प्रारूप तैयार किया गया। हालांकि भारत के संविधान के मसौदे को तैयार करने के लिए मसौदा समिति की आवश्यकता पड़ी।

भारत को आजादी 15 अगस्त 1947 को प्राप्त हुई और भारत ने जल्दी ही अपने संविधान के मसौदे को तैयार करने का काम शुरू किया इसके लिए संविधान प्रारूप समिति 29 अगस्त 1947 को बनाई गई, जिसके अध्यक्ष उस समय के सबसे काबिल व्यक्ति, जो कि सबसे शिक्षित भी थे, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी को अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था।

प्रारूप समिति क्या है?

29 अगस्त 1947 को डॉ भीमराव अंबेडकर की अध्यक्षता में मसौदा समिति, जिसे प्रारूप समिति के नाम से भी जाना जाता है, का निर्माण किया गया। इस समिति में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी को मिलाकर कुल 7 सदस्य थे, और अन्य 6 सदस्यों के नाम के।एम। मुंशी, मोहम्मद सादुल्ला, अल्लादी कृष्णस्वामी अय्यंगर, गोपाल स्वामी आयंगर, व माधवराव तथा टीटी कृष्णमाचारी हुए।

इस समिति का मुख्य कार्य भारत के संविधान का प्रारूप तैयार करना था, इसके बाद 26 नवंबर 1949 को भारत का संविधान सभा के द्वारा स्वीकार किया गया, तथा संविधान सभा की अंतिम बैठक 24 जनवरी 1950 को हुई थी, जिसमें भारत का संविधान 395 अनुच्छेद 8 अनुसूची तथा 22 भागों के साथ तैयार की गई। सभी प्रतिनिधियों ने इस संविधान पर हस्ताक्षर किए तथा इसे भारत के लिए स्वीकार किया।

भारत के संविधान के तहत भारतीय संविधान सभा को हटाकर इसके जगह लोकसभा व राज्यसभा की स्थापना की गई। भारत के प्रथम लोकसभा के स्पीकर के तौर पर गणेश वासुदेव मावलंकर जी भारत की पहली लोकसभा के स्पीकर बने।

संविधान सभा के प्रारूप समिति के अध्यक्ष कौन थे?

भारत के संविधान का प्रारूप संविधान सभा के द्वारा तैयार किए गए प्रारूप समिति के द्वारा तैयार किया गया था। इस समिति का अध्यक्ष डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी को नियुक्त किया गया था।

इसका मुख्य कारण यह था कि डॉक्टर भीमराव अंबेडकर उस समय के सबसे काबिल नेताओं में से एक थे, जिनकी जनता में पहुंच भी अधिक थी। भारत के निचले तबके के लिए उन्होंने सबसे अधिक कार्य किए।

भारत का संविधान कब स्वीकार किया गया

भारत का संविधान 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा के द्वारा अपनाया गया, और 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा की अंतिम बैठक हुई, जिसमें भारत के संविधान (जिसमें 395 अनुच्छेद थे, 8 अनुसूचियां थी, और 22 भाग थे) को भारत की संविधान सभा की अंतिम बैठक में सभी प्रतिनिधियों के द्वारा स्वीकार किया गया तथा उस पर हस्ताक्षर किए गए।

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का प्रारूप समिति में योगदान

भारत की प्रारूप समिति जिसे मसौदा समिति भी कहा जाता है, उसमें डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी का योगदान काफी ज्यादा था। इसमें डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी ने एक अध्यक्ष की भूमिका निभाई और भारत के संविधान का मसौदा यानी कि प्रारूप तैयार किया।

निष्कर्ष

आज के लेख में हमने जाना कि Samvidhan Sabha ke Prarup Samiti ke Adhyaksh Kaun the? इसी के साथ हमने यह भी जाना कि संविधान सभा क्या है और संविधान सभा की स्थापना किस प्रकार की गई।

हम आशा करते हैं कि आप समझ चुके होंगे कि संविधान सभा के प्रारूप समिति के अध्यक्ष कौन थे। यदि आप कोई सवाल पूछना चाहते हैं तो कमेंट बॉक्स में कमेंट करके पूछ सकते हैं।

FAQ

संविधान सभा का निर्माण कब और कैसे हुआ?

मंत्रियों के इस समूह को कैबिनेट मिशन के रूप में जाना जाता है। 15 अगस्त 1947 को भारत के स्वतंत्र होने के बाद, यह संविधान सभा पूरी तरह से संप्रभु बन गई। इस विधानसभा ने अपना काम 1 दिसंबर 1946 से शुरू किया था। संविधान सभा के सदस्यों का चुनाव भारत की राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा किया जाता था।

भारत की संविधान सभा का निर्माण कैसे हुआ?

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ओर से जवाहरलाल नेहरू ने मांग की कि संविधान सभा में केवल भारतीयों को भाग लेना चाहिए। अगस्त प्रस्ताव में अंग्रेजों ने इस मांग को स्वीकार कर लिया। भारत छोड़ो आंदोलन से पहले, क्रिप्स मिशन ने कहा था कि द्वितीय विश्व युद्ध (1939-1945) के बाद संविधान सभा का गठन किया जाएगा। कैबिनेट मिशन ने संविधान सभा का गठन किया।

संविधान किसने लिखा था?

जेम्स मैडिसन को संविधान के जनक के रूप में जाना जाता है क्योंकि दस्तावेज़ के प्रारूपण के साथ-साथ इसके अनुसमर्थन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। मैडिसन ने पहले 10 संशोधनों – बिल ऑफ राइट्स का भी मसौदा तैयार किया।

भारत में कितने संविधान हैं?

एक संप्रभु राष्ट्र के लिए भारतीय संविधान दुनिया का सबसे लंबा संविधान है। इसके अधिनियमन में इसके 22 भागों में 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियाँ थीं। लगभग 1,45,000 शब्दों में, यह अलबामा के संविधान के बाद दुनिया का दूसरा सबसे लंबा सक्रिय संविधान है।