मन्नू भंडारी की कहानी का सारांश

मन्नू भंडारी की कहानी का सारांश: मन्नू भंडारी का जन्म 3 अप्रैल को हुआ था, और 15 नवंबर 2021 को उनका दुखद देहांत हो गया था। वह भारत के एक महान लेखक के रूप में जानी जाती थी। लेखिका के साथ-साथ एक स्क्रीनप्ले राइटर, टीचर और हिंदी नोवेल्स ‘आपका बंटी’  और ‘महाभोज’ जैसी 150 से भी ज्यादा छोटी-छोटी कविताओं की लेखक के तौर पर उन्हें पहचाना जाता था।

लेकिन कई कहानियों में से लोग अक्सर उनकी कहानियों का सारांश समझ नहीं पाते थे। इसीलिए आज भी हम आपको ऐसे ही मन्नू भंडारी की एक कहानी का सारांश बताएंगे।

हालांकि भंडारी की कविता का सारांश जान पाना थोड़ा मुश्किल है। लेकिन आज आप जान पाएंगे कि भंडारी की कहानी का सारांश क्या है। तो चलिए शुरू करते हैं-

मन्नू भंडारी की मजबूरी की कहानी

मन्नू भंडारी की मजबूरी की कहानी की शुरुआत एक पारिवारिक कहानी के तौर पर होती है, जिसमें यह दिखाया जाता है कि एक बूढ़ी मां अपने बेटे के पुत्र यानी कि अपने पोते के खिलाफ कितना प्रेम रखती है। इस कहानी की शुरुआत एक लोरी के साथ होता है, जिसमें गुड़िया अपने पोते के लिए लोरी गा रही होती है।

वह अपने घर को साफ सफाई से सर भरपूर रखती है। साथ ही सदैव खुशी में रहने की कोशिश करती है। हालांकि बुढ़ापे का दर्द उनके पैरों तक पहुंच जाता है, और उन्हें सदैव पैरों में दर्द रहता है। लेकिन फिर भी वह कामकाज करती रहती है। अपने घर में वह अपने पति के साथ अकेली रहती है।

उसका बेटा रामेश्वर मुंबई में अपनी पत्नी तथा बच्चे के साथ रहता है। कुछ समय के बाद रामेश्वर अपनी माता को फोन करके बताता है कि उसकी बीवी को बच्चा होने वाला है, इसलिए वह अपने बेटे को अपनी मां के पास छोड़ना चाहता है। उसकी मां बहुत खुश हो जाती है और उसके आने का इंतजार करती है।

रामेश्वर अपनी मां को अम्मा के नाम से बुलाता है। रामेश्वर जल्दी ही गांव पहुंच जाता है; और जैसे ही अम्मा को तांगे की आवाज सुनती है तो अपने पोते बेटू को अपने गले से लगा लेती है। वह अपने पोते को अपने साथ देख कर बहुत खुश होती है, और अपने पोते के लिए लोरी गाती है।

अपने पोते के लिए काम करती रहती है। सारा दिन घर में साफ सफाई करती है। उसके पैरों में दर्द रहता है लेकिन अपने पोते की और अपने बेटे बहू की आने की खुशी में ढेर सारा गम भूल जाती है। सारा दर्द भूल जाती है, और काम करती रहती है ।उसका बेटा भी पहले लोरी सुने बिना नहीं सो पाता था ऐसे ही। उसका पोता भी बिना लोरी सुने सो नहीं पाता है।

रामेश्वर अपनी पत्नी के साथ अपनी मां के साथ में कुछ दिन रहता है, लेकिन कुछ समय पश्चात मैं अपनी पत्नी के साथ वापस लौट जाता है। बेटू बिल्कुल भी दुखी नहीं होता क्योंकि वह अम्मा के साथ इतना ज्यादा घुल मिल जाता है कि वह अपनी दादी के साथ ही ज्यादा से ज्यादा वक्त बिताना पसंद करता है।

अम्मा भी बेटू के लिए सारा दिन कुछ न कुछ खरीदती रहती, तथा अपने बेटों के लिए दूध की शीशी से साफ करती, और समय पर बेटू को दूध पिलाती।

अम्मा ने घड़ी देखना भी सीख लिया था और 20 दिन के बाद रामेश्वर और उसकी बहू वापस मुंबई जाने लगे, और बेटू ने उसका दुख भी नहीं बताया। वह गली के गंदे बच्चों के साथ खेलने लगा, और फेरी वालों से कुछ न कुछ खरीदता रहता।

लेकिन वह समय के साथ जिद्दी बन गया। अम्मा को लगा कि बड़े होते ही जिद भी ठीक हो जाएगी। रामेश्वर की बहू जिसका नाम रमा था, वह कुछ समय पश्चात बेटू को वापस अपने साथ ले जाना चाहती थी। लेकिन बेटू ना तो वापस जाना चाहता था और ना ही अम्मा उसे ले जाने देना चाहती थी।

लेकिन 3 वर्षों के पश्चात यह देखा गया कि रमा का दूसरा बेटा थोड़ी बहुत अंग्रेजी भी बोलने लगा और अंग्रेजी में छोटी-छोटी कविताएं भी बोलता था, और वही बेटू गवांरों की भांति रहता और यह देखकर रामेश्वर ने जिद करके बेटू को रमा के मायके में लेकर चला गया, अर्थात मुंबई लेकर चला गया।

वहां पर बेटू का रो रो कर बुरा हाल हो रहा था, इसलिए रमा वापस बेतु को अम्मा के पास वापस लेकर आगयी। एक साल बाद फिर से बेटू में कोई परिवर्तन नहीं आया।  तो रमा हमेशा के लिए बेटू को अपने साथ ले गयी।

अम्मा को लगा की कुछ समय बाद बेटू वापस उसके पास लौट कर आएगा। लेकिन कुछ समय पश्चात जब बेटू वापस लौट कर ना आया तो हम आपको निराश होने लगी, और हमारे सोचने लगी कि अब तो बेटू अम्मा को भूल गया होगा, बेटू का मन लग गया होगा, उसके बहुत सारे नए दोस्त भी बन गए होंगे।

हालांकि अम्मा अपने बेटू की उस काल्पनिक खुशी के लिए अम्मा ने सवा रुपए के पेड़े मंगवाए और उसे लोगों में बांट दिया। अब  अम्मा भी खुश हो गई।

मन्नू भंडारी की कविता का सारांश

भंडारी किस कविता का सारांश यह है कि जब एक व्यक्ति किसी से सर्वाधिक प्यार करने लगता है, तो वह उसे अपने पास देखकर अधिक खुश होता है, लेकिन उससे भी ज्यादा खुशी उसे उसकी भलाई में तथा उसके के स्वर्णिम भविष्य को देखकर होती है।

जिस प्रकार अम्मा बेटू के जाने के बाद उसके स्वर्णिम भविष्य को देखकर वापस से खुश हो गई थी। यह बताता है कि प्रेम का वास्तविक अर्थ क्या हो सकता है। लेखिका मन्नू भंडारी यह उद्देश्य रखती है कि आपके मन में अंतर्द्वंद चल रहा है और उनका एकाकीपन और उनकी मार्मिकता उनके प्रेम को नहीं इला सकी।

निष्कर्ष

आशा है या आर्टिकल आपको बहुत पसंद आया हुआ इस आर्टिकल में हमने बताया मन्नू भंडारी के साहित्य की प्रमुख विशेषताएं लिखिए के बारे मे संपूर्ण जानकारी देने की कोशिश की है अगर यह जानकारी आपको अच्छी लगे तो आप अपने दोस्तों के साथ भी Share कर सकते हैं अगर आपको कोई भी Question हो तो आप हमें Comment कर सकते हैं हम आपका जवाब देने की कोशिश करेंगे।

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