वैश्वीकरण के राजनीतिक प्रभाव क्या है?

वैश्वीकरण के राजनीतिक प्रभाव क्या है?

मित्रों, जैसा कि हम जानते हैं कि वैश्वीकरण को एक प्रकार से वैश्विक समाज के संदर्भ में समझा जा सकता है, और इसके विभिन्न प्रकार के राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव लोगों पर पड़ सकते हैं। आज के समय विभिन्न प्रकार के राजनेता वैश्वीकरण का लाभ उठाते हुए अपनी राजनीति चमकाने का प्रयास करते हैं। लेकिन राजनेताओं के साथ साथ आम जनता को भी वैश्वीकरण के अच्छे व् बुरे प्रभाव देखने को मिलते है।

इसी के साथ लोगों को कई बार भड़काने का काम भी वैश्वीकरण के माध्यम से ही किया जाता है। उनमें से अधिकतम चीजें लोगों की जानकारी से परे होती है, और इसी कारण लोग राजनेताओं की चिकनी चुपड़ी बातों में आ जाते हैं।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि वैश्वीकरण क्या होता है और vaishvikaran ke rajnitik prabhav क्या हो सकते हैं? यदि आप नहीं जानते तो कोई बात नहीं क्योंकि आज हम आपको बताने वाले हैं कि वैश्वीकरण क्या होता है, इसके फायदे और नुकसान है तथा मानव समाज व् संस्कृति पर इसके क्या प्रभाव देखने को मिलते है।

तो चलिए शुरू करते है-

वैश्वीकरण क्या होता है? | Vaishvikaran kya hai?

मित्रों, वैश्वीकरण मूल रूप से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किन्ही भी दो संस्कृति और समाज को आपस में जोड़ता है। किसी भी देश में वैश्वीकरण तो सार्थक रूप से अपनाया जाता है तब यह देखा जाता है कि वैश्वीकरण के राजनीतिक फायदे और राजनीतिक नुकसान भी उस देश को सहने पड़ते हैं।

किसी भी देश और राष्ट्र में वैश्वीकरण का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि प्रजातांत्रिक देशों में वैश्वीकरण के कारण आम जनता में ज्ञान व जागरूकता की बढ़ोतरी होती है, लोगों को अपने अधिकारों के बारे में पता चलता है।

vaishvikaran ke sanskritik prabhav

वैश्वीकरण का उद्देश्य | Vaishvikaran ka Uddeshya

वैश्विक्ररण का मूल उद्देश्य वैश्विक संस्कृतियों से उन गुणों की प्राप्ति करना है जो हमारे समाज के लिए उचित है। वैश्वीकरण के उद्देश्य में जनता को उनके अधिकारों के प्रति सजग करना शामिल है।

वह अपने नेताओं पर अंकुश लगाने को लेकर जनता अधिक सजग होती है। उनके देश यह कुनबे के सिवा जहां लोग रहते हैं। वह किस प्रकार का खाना खाते हैं कपड़े पहनते हैं वह व्यापार करते हैं लोगों की संस्कृतियों में घुलना मिलना वैश्वीकरण का मूल स्वभाव है।

वैश्वीकरण का उदाहरण

उदाहरण के तौर पर भारत में दिवाली पर लोग अपने घरो में दिए जलने का काम करते थे, और कई स्थानों पर आतिशबाजी भी की जाती थी। लेकिन पश्चिमी देशों में किसी विशेष त्योहार पर घर में प्रकाश से जगमगाती रोशनी और आभा की जाती थी।

आज के समय, वैश्वीकरण के कारण आज के समय दिवाली पर भारत में रंग बिरंगी लाइट से घर को रोशन किया जाता है, साथ ही साथ पश्चिमी देशों में आतिशबाजी भी की जाती है। यह वैश्वीकरण का एक छोटा सा प्रभाव है जो किसी भी देश की सांस्कृतिक व्यवस्था में घुसते हुए देखा जा सकता है।

वैश्वीकरण के राजनीतिक प्रभाव क्या है? | vaishvikaran ke rajnitik prabhav kya hai

वैश्वीकरण का राजनीतिक प्रभाव लोकतांत्रिक मूल्यों में बढ़ोतरी करने के संदर्भ में देखा जा सकता है। वैश्वीकरण एक तरीके से लोकतंत्र को फायदा व हानि दोनों पहुंचाता है। हमने आपको वैश्वीकरण के प्रभाव नीचे बिंदुओं के रूप में दिए हैं :-

  • वैश्वीकरण के प्रभाव के चलते मुक्त चुनाव को प्रसिद्धि मिलती है।
  • लोगों को सत्ता का सही मतलब समझ में आता है।
  • वैश्वीकरण के कारण की किसी राज्य में राज्य की शक्तियों का पृथक्करण और उन शक्तियों के अनधिकृत उपयोग आर जनता के द्वारा अंकुश लगाने का काम भी किया जाता है।
  • जनता को अपनी शक्तियों का एहसास होता है।
  • जनता आंतरिक और बाहरी खतरों के लिए समर्थवादी और उदारतापूर्वक निर्णय लेने वाले राजनेता को अपने समाज से ही चुनने की क्षमता रखती है।
  • किसी भी देश में राजनीतिक कार्यों में पार्टियों, राजनीतिक समूहों ,तथा सामाजिक बलों में स्वतंत्रता देखी जा सकती है, उनमें वैश्वीकरण के प्रभाव देखी जा सकते हैं।
  • विभिन्न प्रकार के सूचकांकों के द्वारा लोकतांत्रिक मूल्यों में मजबूती लाई जा सकती है।
  • नागरिकों की स्वतंत्रता और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
  • लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की आजादी अंतरात्मा और संघ के द्वारा किए गए कार्यों में जनता की भागीदारी शामिल की जा सकती है।
  • साथ ही संविधान का संहिताकरण (Codification) और उसका सम्मान बढ़ाया जा सकता है। लोकतांत्रिक देश में कानून व्यवस्था को सही ढंग से स्थापित किया जा सकता है।
  • कानून का सही इस्तेमाल किया जाए, इस लिए संस्थाए एक दुसरे पर नजर रखने का काम कर सकती है।
  • किसी भी राज्यादेश के कारण लोगों को बेमतलव दिक्कत का सामना न करना पड़े, इसके लिए जनता शक्तियों का विकेंद्रीकरण कर सकती है।
  • शक्तियों का विकेंद्रीकरण और क्षमताओं का केन्द्रीकरण वैश्वीकरण का प्रमुख फायदा है और यही वैश्वीकरण का नुक्सान भी है।

यह सारे vaishvikaran ke rajnitik prabhav है जो किसी भी देश की राजनीतिक व्यवस्था में वैश्वीकरण के कारण देखे जा सकते हैं।

निष्कर्ष

आज के लेख में हमने जाना कि वैश्वीकरण क्या होता है, वैश्वीकरण का उद्देश्य क्या है, तथा vaishvikaran ke rajnitik prabhav क्या हो सकते हैं। आज के लेख में हमने वैश्वीकरण के बारे में आपको विस्तार से जानकारी दी है। हम आशा करते हैं कि आज का यह लेख आपके लिए काफी मददगार सिद्ध होगा।

यदि आप कोई सवाल पूछना चाहते हैं, तो कमेंट बॉक्स में कमेंट कर सकते हैं।

FAQ

वैश्वीकरण का राजनीतिक प्रभाव क्या पड़ा है?

लोकतंत्र पर वैश्वीकरण का प्रभाव एक विशिष्ट सीमा तक सीमित नहीं है। लोकतंत्र के सभी आधारों पर वैश्वीकरण को प्रभावित करने वाली कुछ वैचारिक मान्यताएँ हैं: अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, विश्वास और धर्म की स्वतंत्रता, नागरिक समुदाय, नागरिकता अधिकार, राज्य गतिविधि की सीमा, राज्यपालों की वैधता, प्रेस की स्वतंत्रता, और इसी तरह।

वैश्वीकरण के राजनीतिक आयाम क्या है?

राजनीतिक आयाम: वैश्वीकरण के कारण राष्ट्र द्वारा किए गए कार्यों में व्यापक परिवर्तन आया है। वैश्वीकरण की इस अंधी दौड़ में शामिल सरकारों ने अपने नागरिकों के लिए क्या अच्छा है और क्या बुरा, यह तय करने का अधिकार कम कर दिया है।

वैश्वीकरण के आर्थिक प्रभाव क्या है?

आर्थिक वैश्वीकरण वैश्वीकरण का आर्थिक आयाम है। आईएमएफ और विश्व व्यापार संगठन दुनिया भर में वैश्वीकरण की आर्थिक नीतियों का निर्धारण करते हैं। जबकि आर्थिक वैश्वीकरण ने विकासशील देशों में आय और आर्थिक विकास में वृद्धि की है और विकसित देशों में उपभोक्ता कीमतों में कमी आई है, यह विकासशील और विकसित देशों के बीच शक्ति संतुलन को भी बदलता है।