व्यवस्थापिका किसे कहते हैं? | Vyavasthapika Kise Kahate Hain

नमस्कार दोस्तों, व्यवस्थापिका हमारे भारत सरकार का एक अति महत्वपूर्ण अंग होता है, तथा भारत देश को चलाने के अंतर्गत व्यवस्थापिका का काफी महत्वपूर्ण योगदान होता है। दोस्तों क्या आप जानते हैं कि व्यवस्थापिका किसे कहते हैं (vyavasthapika kya hai), यदि आपको इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है, तथा आप इसके बारे में जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो आज की इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको इस विषय के बारे में संपूर्ण जानकारी देने वाले हैं।

इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको बताने वाले हैं कि व्यवस्थापिका क्या है, हम आपको इस विषय से जुड़ी लगभग हर एक जानकारी इस पोस्ट के अंतर्गत शेयर करने वाले हैं। तो ऐसे में आज का की यह पोस्ट आपके लिए काफी महत्वपूर्ण होने वाली है, तो इसको अंत जरूर पढ़िए।

व्यवस्थापिका किसे कहते हैं? | Vyavasthapika Kise Kahate Hain

दोस्तों कई अलग-अलग प्रकार की परीक्षाओं के अंतर्गत व्यवस्थापिका किसे कहते हैं से संबंधित सवाल पूछे जाते हैं, तथा वहां पर अनेक छात्रों को इस सवाल के बारे में जानकारी नहीं होती है। यदि दोस्तों आपको भी इस विषय के बारे में कोई जानकारी नहीं है, तो आपकी जानकारी के लिए मैं बता दूं कि व्यवस्थापिका हमारे सरकार का एक ही महत्वपूर्ण अंग होता है, जो कानून निर्माण का कार्य करता है।

दोस्तों अक्सर हम व्यवस्थापिका को संसद के नाम से जानते हैं, लेकिन संसद को व्यवस्थापिका ही कहा जाता है। इसके अलावा राज्य स्तर पर व्यवस्थापिका को विधानसभा के नाम से जाना जाता है।

सरकार के अंग

जैसा कि दोस्तों आपने यह तो जरूर सुना होगा कि सरकार के तीन अंग होते हैं:-

Vyavasthapika Kise Kahate Hain

  1. व्यवस्थापिका
  2. कार्यपालिका
  3. न्यायपालिका

इन सभी अंगों के अंतर्गत व्यवस्थापिका का कार्य सरकार के अंतर्गत व्यवस्था बनाना, कानून बनाना, अलग-अलग प्रकार की योजनाओं के बारे में विचार करना, इसके अलावा किस तरह से सरकार को चलाना है, या फिर किस तरह से कानून व्यवस्था को चलाना है, इसकी योजना बनाना तथा इसका पूरा कार्य व्यवस्थापिका के हाथ में ही होता है।

कार्यपालिका का कार्य होता है, कि व्यवस्थापिका के द्वारा बनाए गए कानूनों को लागू करने का कार्य कार्यपालिका कार्य होता है। व्यवस्थापिका जो भी कानून बनाती है या फिर जो भी नियम अधिनियम बनाती है, उसको लागू करने तथा उसको सुचारू रूप से चलाने का कार्य कार्यपालिका का ही होता है।

इसके अलावा न्यायपालिका का कार्य व्यवस्थापिका के द्वारा बनाए गए कानून तथा कार्यपालिका के द्वारा लागू के कानूनों की व्याख्या करना होता है, न्यायपालिका के द्वारा अलग-अलग कानूनों की व्याख्या की जाती है, कि सरकार के द्वारा बनाए जा रहे कानून सही है या फिर गलत है। यदि न्यायपालिका को उसके अंतर्गत कुछ गलत लगता है, तो वह उसके खिलाफ एक सीरियस एक्शन भी ले सकता है।

व्यवस्थापिका के स्तर

दोस्तों व्यवस्थापिका मुख्य रूप से भारत के अंतर्गत 2 स्तरों पर कार्य करती है जिसमें पहला केंद्र स्तर पर तथा दूसरा राज्य स्तर पर।

1. केंद्र स्तर पर कार्य करने वाली व्यवस्थापिका को संसद के नाम से जाना जाता है, जिसके मुख्य रूप से तीन महत्वपूर्ण अंग होते हैं, जिसमें राष्ट्रपति राज्यसभा और लोकसभा शामिल है।

2. इसके अलावा राज्य स्तर पर कार्य करने वाली व्यवस्था को विधानमंडल के नाम से जाना जाता है, जिसके भी मुख्य रूप से तीन ही महत्वपूर्ण अंग होते हैं, जिसमें राज्यपाल, विधानसभा और विधान परिषद शामिल होता है।

व्यवस्थापिका के न्यायिक कार्य

यद्यपि न्यायिक कार्यों को करना न्यायपालिका का कार्य है, लेकिन आज कई देशों में विधायिकाएं पूर्ण या अर्ध-न्यायिक कार्य भी करती हैं। हाउस ऑफ लॉर्ड्स, संसद का ऊपरी सदन, इंग्लैंड में अपील का सर्वोच्च न्यायालय है। अमेरिका में, सीनेट राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग के बारे में अंतिम निर्णय देने के लिए एक अदालत के रूप में बैठता है। भारत में, राज्य सभा (उच्च सदन) राष्ट्रपति पर महाभियोग की सुनवाई और निर्णय की व्यवस्था करती है।

स्विट्ज़रलैंड में संविधान की व्याख्या करने की नेशनल असेंबली की शक्ति के कारण इसे न्यायिक कार्य करने वाली विधायिका भी कहा जाता है। लेकिन आज तक भारत और अमेरिका में किसी भी राष्ट्रपति को महाभियोग का परिणाम नहीं भुगतना पड़ा है। इसलिए, विधायिका न्यायिक कार्य भी करती है।

कार्यपालिका और व्यवस्थापिका में क्या अंतर है?

विधायिका का मुख्य कार्य कानून बनाना है। कार्यपालिका वह अंग है जो विधायिका द्वारा बनाए गए कानूनों को लागू करती है और राज्य की इच्छा को लागू करती है।

आज आपने क्या सीखा

तो आज की इस पोस्ट के माध्यम से हमने आपको बताया कि व्यवस्थापिका किसे कहते हैं, व्यवस्थापिका के बारे में बताइए (vyavasthapika kya hoti hai), हमने आपको इस पोस्ट के अंतर्गत के विषय से जुड़ी लगभग हर एक जानकारी को देने का प्रयास किया है। इसके अलावा हमने आपके साथ इस पोस्ट के अंतर्गत व्यवस्थापिका से जुड़ी कुछ अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां भी शेयर की है, जैसे कि व्यवस्थापिका क्या होती है, भारत के अंतर्गत व्यवस्थापिका किस तरह से कार्य करती है, व्यवस्थापिका के कौन कौन से महत्वपूर्ण अंग होते हैं, तथा इसका क्या क्या कार्य होता है।

आज की इस पोस्ट के माध्यम से हमने आपको इस विषय से जुड़ी लगभग हर एक जानकारी को देने का प्रयास किया है। हमें उम्मीद है कि आपको हमारे द्वारा दी गई यह इंफॉर्मेशन पसंद आई है, तथा आपको इस पोस्ट के माध्यम से कुछ नया जानने को मिला है। इस पोस्ट को सोशल मीडिया के माध्यम से आगे शेयर जरूर करें, तथा इस विषय के बारे में अपनी राय हमें नीचे कमेंट में जरूर बताएं।

FAQ

व्यवस्थापिका और विधायिका में क्या अंतर है?

विधायिका को ‘विधायी’ या ‘विधायिका’ के रूप में भी जाना जाता है। सरकार के तीन मुख्य अंग हैं – कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका। सरकार के तीनों अंग अलग-अलग कार्य करते हैं।

व्यवस्थापिका का अध्यक्ष कौन होता है?

इस पड़ाव को सुनें राज्य की कार्यपालिका का मुखिया राज्यपाल (गवर्नर) होता है, जो मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार कार्य करता है। कुछ मामलों में राज्यपाल को विवेकाधिकार दिया गया है, ऐसे में वह मंत्रिपरिषद की सलाह के बिना भी कार्य करता है। राज्यपाल अपने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति भी होते हैं।

व्यवस्थापिका का दूसरा नाम क्या है?

इसे आमतौर पर संसद के रूप में जाना जाता है। पार्लियामेंट शब्द फ्रांसीसी शब्द ‘पार्लर’ से बना है जिसका शाब्दिक अर्थ है – बोलना या बोलना और लैटिन शब्द ‘पार्लियामेंटम’।

भारत में कौन से शासन व्यवस्था है?

भारत एक लोकतांत्रिक गणराज्य है, जिसमें वेस्टमिंस्टर शैली की संसदीय प्रणाली द्वारा शासित द्विसदनीय संसद है। इसके शासन के तीन मुख्य अंग हैं: न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका।

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