Basil leaves in Hindi | तुलसी के पत्ते कि लाभकारी गुणों का परिचय

Basil leaves in Hindi | तुलसी के पत्ते कि लाभकारी गुणों का परिचय

Basil अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग प्रकार की पाई जाती है। Basil और तुलसी दोनों अलग अलग पौधे होते हैं, परंतु लोग अक्सर तुलसी और basil को एक ही समझ लेते है, इसलिए आज के इस लेख मे हम basil leaves in hindi के बारे मे बताने वाले है, साथ ही आपको इसके फायदो के बारे में भी बतायेंगे। तुलसी और basil मे क्या फर्क होता है, यह भी हम इस लेख के माध्यम से जानेंगे।

तो इस जानकारी के लिए आप हमारे साथ इस लेख के अंत तक जरूर बने रहे।

Basil के प्रकार

धरती पर basil कई प्रकार की पाई जाती है। यह हर क्षेत्र में अलग-अलग प्रकार की होती है। Basil को दो भागों में बांटा गया है जो निम्न है:-

  1. Sweet basil
  2. Holy basil अर्थात तुलसी

Sweet basil

Sweet basil का प्रयोग मुख्यतः खाना पकाने में किया जाता है। इसके अंतर्गत भी कई किस्मे आती है, जो निम्न प्रकार से है:-

  1. Sweet basil
  2. Thai basil
  3. Purple basil
  4. Lemon basil
  5. American basil
  6. Summer long basil etc.

इस लेख के माध्यम से हम sweet basil के बारे में विस्तार पूर्वक जानेंगे।

Holy basil

इस प्रकार की तुलसी भारतीय घरों में अधिक पाई जाती है। भारत में पुराने समय से ही इसे पूजनीय माना गया है। साथ ही तुलसी में कई प्रकार के रोगों से लड़ने की क्षमता भी होती  है। Holy basil की भी अलग-अलग प्रजातियां होती है जो निम्न है:-

  1. Rama tulsi
  2. Krishna tulsi
  3. Amrita tulsi
  4. Vana tulsi

Basil plant और तुलसी मे अंतर

Basil का पौधा तुलसी की ही तरह होता है परंतु इसके leaves तुलसी के पतों से size मे थोड़े बड़े होते है। Basil के पते तुलसी के पतों  से गाढ़े रंग के होते हैं। तुलसी के पौधे को English मे holy basil कहते हैं और basil को के पौधे को Italian basil या फिर sweet basil कहते हैं।

Basil seeds

तुलसी के बीजों की तुलना मे basil के बीज थोड़े बड़े होते हैं। Basil की तासीर ठण्डी होती है। यह हमारे बॉडी की heat को reduce करती हैं।

Basil plant के तथ्य

  • बेसिल के पतियों का taste हल्का मीठा होता है।
  • बेसिल का पौधा अधिक temperature सहन नहीं कर पाता।
  • Basil plant 45 डिग्री सेल्सियस के बाद मुरझान लगता है।
  • Basil को italian basil और sweet basil के नाम से भी जाना जाता है।
  • Basil का पौधा और तुलसी, देखने मे एक जैसे ही लगते हैं, basil की पतिया तुलसी की पतियों से थोड़ी बड़ी और कुछ गाढ़ी होती है।
  • Basil की leaves बहुत से रोगों का समाधान करती है।
  • Basil का वैज्ञानिक नाम ocimum basilcum है।
  • Basil मे vitamin A, vitamin K, केरोटीन, कॉपर, iron, calcium, mg, potassium और कई प्रकार के anti oxidant शामिल होते हैं।

Basil के पत्तों के फायदे

Basil Leaves In Hindi: तुलसी के पत्ते कि लाभकारी गुणों का परिचय

  • Basil के पत्तों को चबाने से से body और mind को डिप्रेशन और stress से बचा सकते हैं क्योंकि basil के पत्तों में anti stress एलिमेंट मौजूद होते हैं।
  • Italian basil मे मौजूद antioxidant हमारे DNA और cell को protect करती है जिसकी वजह से हमारी उम्र बढ़ने का प्रोसेस slow हो जाता है। इसका मतलब यह हुआ कि basil leaves लंबे समय तक जवान बनाए रख सकती है।
  • Basil मे विटामिन ए पाया जाता है जो हमारी आंखों की रोशनी को बढ़ाने में सहायक होता है।
  • Italian basil मे विटामिन k भी मौजूद होता है जो हमारे शरीर की हड्डियों को मजबूत बनाए रखता है।
  • Basil leaves को चबाकर खाने से भी काफी लाभ पहुंचता है, यह पेट से संबंधित समस्या जैसे गैस, कब्ज, पेट में कीड़े को भी दूर करती है।
  • Basil leaves और तुलसी के पत्तों का काढ़ा बनाकर पीने से फीवर की समस्या को दूर किया जा सकता है।
  • Basil seeds भी काफी लाभदायक होते हैं। यह हमारी त्वचा से एग्जिमा और सोरायसिस जैसे रोगों को ठीक करता है। इसके लिए बेसिल के बीज को पीसकर उसका पाउडर बनाकर, पाउडर को दो चम्मच नारियल के तेल मे पका कर ठंडा होने दे। ठंडा हो जाने के बाद इस पेस्ट को अपनी त्वचा पर अप्लाई करें इसके काफी अच्छी रिजल्ट देखे जाते हैं।
  • Basil seeds मे मौजूद प्रोटीन और iron भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं यदि इसके बीजों को खाया जाए तो बाल लंबे, घन, चमकदार मजबूत होते हैं और तेजी से बढ़ते हैं।
  • यह वजन कम करने में भी सहायक होता है। दो चम्मच बेसिल सीड्स लेकर 200 ml पानी में भिगो दें और इसका सेवन करें। इसके सेवन से वजन कम करने में काफी मदद मिलेगी।

कैसे बनाएं तुलसी वाला दूध | how to make basil milk

लगभग डेढ़ गिलास स्किम्ड या फुल क्रीम दूध लें। अब इसे उबाल लें, जब यह उबलने लगे तो इसमें तुलसी के लगभग दस पत्ते डालकर दूध के गिलास बनने तक उबालें। जब दूध पीने लायक हो जाए तो आप इसे घूंट-घूंट कर पीएं। कोशिश करें कि सुबह दूध का सेवन करें। चाय की जगह इस दूध को पीने की आदत डालें।

तुलसी के पत्ते की हर्बल चाय | Herbal tea of Tulsi

एक लाभकारी हर्बल चाय तैयार करने के लिए तीन किस्मों का उपयोग किया जाता है, जो ऑनलाइन या प्राकृतिक उत्पाद स्टोर और हर्बलिस्ट पर उपलब्ध हैं।

ऐसे कई लाभ हैं जो नियमित रूप से पत्तियों पर आधारित अर्क लेने से प्राप्त किए जा सकते हैं:

  • तनाव का प्रतिकार करता है
  • जी मिचलाने की भावना को दूर करता है
  • प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करें
  • लीवर और फेफड़ों को स्वस्थ रखता है
  • बुखार कम करता है
  • अस्थमा और मौसमी बीमारियों के लक्षणों से राहत दिलाता है
  • रक्तचाप को नियंत्रित करता है
  • सामान्य भलाई को बढ़ावा देता है
  • ऊर्जा के स्तर में सुधार करता है
  • शरीर को साफ करता है
  • खून को शुद्ध करता है
  • त्वचा को जवान रखता है
  • पुरानी बीमारियों से बचाता है
  • पाचन को सुगम बनाता है

निष्कर्ष

दोस्तों इस लिए के माध्यम से हमने basil leaves in hindi के बारे में विस्तार पूर्वक जाना है। यदि आपको यह जानकारी अच्छी लगी है तो आप इसे अपने दोस्तों और फैमिली के साथ जरूर शेयर करें। इस जानकारी से संबंधित आप अपने opinion हमें कमेंट बॉक्स में कमेंट करके जरूर बताएं। इसके अलावा यदि आप किसी अन्य topic पर जानकारी चाहते हैं तो आप हमें कमेंट सेक्शन में लिखकर बता सकते हैं।

FAQ

बेसिन का मतलब क्या होता है?

बेसिल नाम का मतलब राजा, तुलसी जड़ी बूटी होता है।

तुलसी के पत्ते क्या है?

तुलसी के पत्तों में एंटी-बैक्टीरियल तत्व होते हैं जो खांसी, जुकाम, सर्दी जैसी समस्याओं से राहत दिलाते हैं और श्वसन तंत्र को बेहतर बनाते हैं। साथ ही इसमें पाया जाने वाला एसिड पाचन संबंधी समस्याओं को भी दूर करता है। तुलसी के पत्तों में मौजूद एडाप्टोजेन तनाव को कम करने का काम करता है।

तुलसी का स्थानीय नाम क्या है?

तुलसी का बैज्ञानिक नाम ओसिमुम तेनुइफ़्लोरुम (ऑसीमम सैक्टम) है।

तुलसी अर्क कब लेना चाहिए?

अगर आप टाइफाइड से पीड़ित हैं तो 20-21 तुलसी के पत्ते, 10 काली मिर्च डालकर काढ़ा बनाकर दिन में तीन बार सेवन करें। इससे आपको टाइफाइड बुखार से राहत मिलेगी। इसके अलावा तुलसी का अर्क भी कारगर साबित होगा।

तुलसी का असली नाम क्या है?

तुलसी माता की कथा के अनुसार तुलसी का असली नाम वृंदा था, जो एक राक्षस कुल में पैदा हुई थी, वृंदा एक राक्षस कुल में पैदा होने के बाद भी भगवान विष्णु की भक्त थी।

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