हिंदी के जनक कौन है? | Father of Hindi Subject

हिंदी के जनक कौन है? | Father of Hindi Subject

दोस्तों, आज के समय हमारी हिंदी भाषा भारत में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओँ में से एक है। भारत की तकरीबन आधी जनसंख्या हिंदी भाषा में वार्तालाप कर सकती है, और लगभग एक चौथाई लोगों की प्रथम भाषा हिंदी है।

आज की शिक्षा प्रणाली के अंतर्गत भारत के लगभग सभी विद्यालयों में हिंदी की शिक्षा प्रदान की ही जाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस महान आधुनिक हिंदी भाषा का जनक किसे माना जाता है, जिसे हम Father of Hindi Subject भी कहते है?

यदि आप नहीं जानते हैं तो कोई बात नहीं, क्योंकि आज के लिए हम आपको बताएंगे कि Father of Hindi Subject कौन है, उनका नाम क्या था, और वह Father of Hindi Subject कैसे बने? तो चलिए शुरू करते हैं और जानते हैं कि Father of Hindi Subject कौन थे-

Father of Hindi Subject कौन थे? | Hindi Vishay ke Janak Kaun the?

वह व्यक्ति जिन्होंने हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने का काम किया, और उसी दिशा में अपनी प्रतिभा का उपयोग किया था, और अंत में Father of Hindi Subject कहलाए थे, उनका नाम “भारतेंदु हरिश्चंद्र” था।

भारतेंदु हरिश्चंद्र उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में पैदा हुए एक महान व्यक्तित्व थे, जिनका जन्म 9 सितंबर 1850 को हुआ था, और अल्पायु में ही, 6 जनवरी 1885 को मात्र 34 वर्ष की आयु में उनका देहांत हो गया था। लेकिन इस आयु में भी उन्होंने आधुनिक हिंदी भाषा के जनक होने का श्रेय अपने नाम ले लिया था।

Father of Subject | सभी विषयों के जनक

विषय (Subject)  जनक / पिता (Father) 
भूगोल के जनक कौन है? (Geography) हिकैटियस
इतिहास के जनक कौन है? (History) हेरोडोट्स
नागरिक शास्त्र के जनक कौन है? (Civics) बेंजामिन फ्रैंकलिन
अर्थशास्त्र के जनक कौन है? (Economics) एडम स्मिथ
भौतिक विज्ञान के जनक कौन है? (Physics) सर आइजैक न्यूटन
रसायन विज्ञान के जनक कौन है? (Chemistry) लवोजियर
जीव विज्ञान के जनक कौन है? (Biology) अरस्तू
वनस्पति विज्ञान के जनक कौन है? (Botany) थियोंफास्टर
कंप्यूटर के जनक कौन है? (Computer) चार्ल्स बैबेज
इंटरनेट के जनक कौन है? (Internet) रॉबर्ट इलियट कान विंड सर्फ
हिंदी साहित्य के जनक कौन है? (Hindi) भारतेंदु हरिश्चंद्र
संस्कृत के जनक कौन है? (Sanskrit) पाणिनि
इंग्लिश के जनक कौन है? (English) जेयाफ्री चौसर
इंग्लिश ग्रामर के जनक कौन है? (English Grammar) लिंडले मुरे
गणित के जनक कौन है? (Mathematics) आर्कमिडीज
बीजगणित के जनक कौन है? (Algebra) मोहम्मद इजममसल ख्वारिज्मी
ज्यामिति के जनक कौन है? (Geometry) यूक्लिड
क्षेत्रमिति के जनक कौन है? (Mensuration) लियोनार्ड डिग्स
त्रिकोणमिति के जनक कौन है? (Trigonometry) हिप्परकुस
सांख्यिकी के जनक कौन है? (Statistics) रोनाल्डो फि सर
प्रायिकता के जनक कौन है? (Probability) ग्रलेमो कारडेनो

भारतेंदु हरिश्चंद्र का जीवन परिचय

hindi ka father kon hai | हिंदी के पिता कौन है

बिंदु (Points) जानकारी (Information)
नाम (Name) हरिश्चंद्र
जन्म (Date of Birth) 9 सितम्बर 1850
आयु 35 वर्ष
जन्म स्थान (Birth Place) वाराणसी, उत्तरप्रदेश
पिता का नाम (Father Name) बाबू गोपाल चन्द्र
वैवाहिक स्थिति विवाहित
कार्य क्षेत्र रचनाकार, साहित्यकार, पत्रकार
कर्म भूमि वाराणसी
विषय आधुनिक हिंदी साहित्य
मृत्यु (Death) 6 जनवरी 1885
भाई-बहन (Siblings) एक भाई
उपाधि “भारतेंदु”

भारतेंदु हरिश्चंद्र जी का जन्म 9 सितंबर 1850 को वाराणसी के काशी में एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय परिवार में हुआ था, और उनके पिता का नाम गोपालचन्द्र था, और ऐसा कहा जाता है कि  वह भी एक अच्छे कवि के तौर पर माने जाते थे, और “गिरधरदास” नामक उपनाम से कविता लिखा करते थे।

सन 1857 की क्रांति में उनकी आयु मात्र 7 वर्ष की होगी एक तरीके से यह उनका बचपन था, जब भारत में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम छेड़ा गया था। भारत में उस समय चल रहे स्वतंत्रता आंदोलन में भारतेंदु हरिश्चंद्र की आंखे बचपन में ही खोल दी थी, और एक बार पूरी हुई आंखें कभी भी बंद नहीं हुई।

भारतेंदु हरिश्चंद्र 5 वर्ष की आयु के थे तब उनकी माता मृत्यु को प्राप्त हो गई, और 10 वर्ष के थे तब उनके पिता की मृत्यु हो गई थी।

इस प्रकार वे बचपन में ही अनाथ हो गए थे, लेकिन अपने धन के कारण उन्होंने अपना बचपन काफी सुदृढ़ता से व्यतीत किया, और अपनी कविता लिखने की कला को तथा हिंदी कार्य में अपनी शिक्षा व ज्ञान को और बढ़ाने का प्रयास किया।

उन्होंने बचपन से ही शिक्षा को अत्यधिक महत्व दिया और एक संवेदनशील व्यक्ति होने के तौर पर उनमें किसी भी कार्य को या दृश्य को देखने की अपनी सोच व समझ विकसित होने लगी।

उनका दृष्टिकोण लगभग सभी लोगों से अलग होने लगा, उन्होंने वाराणसी के क्वींस कॉलेज से अपनी शिक्षा प्राप्त करनी शुरू की। लेकिन वह भी उनका मन नहीं लगता था।

उनकी स्मरण शक्ति तेज़ और ग्रहण क्षमता अद्भुत थी, इस कारण वह परीक्षाओं में भी उत्तीर्ण होते रहे। भारतेंदु ने मात्र 18 वर्ष की आयु में संस्कृत, मराठी, बांग्ला, गुजराती, पंजाबी, उर्दू, कई भाषाएं सीख ली थी।

काव्य प्रतिभा भारतेंदु हरिश्चंद्र को अपने पिता से विरासत के तौर पर मिली थी। यह दोहा उन्होंने मात्र 5 वर्ष की आयु में ही बनाकर अपने पिता को सुनाया और उनसे सुकवि होने का आशीर्वाद प्राप्त किया-

लै ब्योढ़ा ठाढ़े भए श्री अनिरुद्ध सुजान।

बाणासुर की सेन को हनन लगे भगवान॥

जवानी में ही भारतेंदु हरिश्चंद्र अत्यधिक धन खर्च करने के कारण जल्दी ही कर्जे में डूब गए थे, और इसी कारण चिंताओं के कारण का शरीर और शिथिल होता गया, और परिणाम स्वरूप 1885 में 34 वर्ष की अल्पायु में ही मृत्यु को प्राप्त हो गए।

भारतेंदु हरिश्चंद्र के द्वारा किए गए महान कार्य

हिंदी के जनक कौन है? | Father of Hindi Subject

भारतेंदु हरिश्चंद्र का मूल नाम “हरिश्चंद्र” था, लेकिन “भारतेंदु” उनकी अर्जित की गई उपाधि थी। उन्होंने रीतिकाल की कुछ विकृत सामंती संस्कृति के ऊपर ध्यान न देकर स्वस्थ आधुनिक परंपरा की भूमिका अपनाई थी, और अपनी तरफ से नवीनता के बीजारोपण किए थे। भारतेंदु हरिश्चंद्र को “आधुनिक हिंदी भाषा और हिंदी साहित्य का पितामह” कहा जाता है।

“भारतीय नवजागरण” के संपादक के रूप में और अग्रदूत के रूप में भारतेंदु हरिश्चंद्र ने “देश की गरीबी”, “भारतीय शासकों के द्वारा अमानवीय शोषण का चित्रण” तथा “पराधीनता” को ही अपनी हिंदी साहित्य का मूल लक्ष्य बनाया।

भारतेंदु हरिश्चंद्र बहुमुखी प्रतिभा के धनी व्यक्तित्व से हिंदी पत्रकारिता हिंदी नाटक और हिंदी काव्य के क्षेत्र में योगदान अतुलनीय था। हिंदी में मूल नाटकों का प्रारंभ भारतीय का माना जाता है वैसे तो भारतेंदु हरिश्चंद्र जी ने अपने नाटक लिखने की शुरुआत बांग्ला भाषा के विद्या सुंदर नामक नाटक के अनुवाद से की थी। हालांकि इससे पहले भी उन्होंने कई नाटक लिखे थे लेकिन खड़ी बोली में नियमित रूप से लिखा जाने वाला यह उनका पहला नाटक था।

इसके पश्चात उन्होंने अपनी हिंदी नाटक की विधा को  अधिक सुदृढ़ बनाया और अंततोगत्वा एक उत्कृष्ट कभी सर्वसामान्य सफल नाटककार तथा श्रेष्ठ रचनाकार के रूप में एक जागरूक पत्रकार भी थे और उन्हें ओजस्वी गद्यकार’ की उपाधि भी मिली हुई थी। भारतेंदु हरिश्चंद्र जी ने 34 वर्ष की अल्पायु में ही विशाल साहित्य की रचना की थी।

भारतेंदु हरिश्चंद्र की प्रमुख कृतियां

भारतेंदु हरिश्चंद्र की विभिन्न प्रकार की मौलिक नाटक अनुदित नाट्य निबंध संग्रह काव्य कृतियां थी जो उन्होंने मात्र 34 वर्ष की अल्पायु तक लिखी थी-

मौलिक नाटक:-

सत्य हरिश्चंद्र, श्री चंद्रावली, भारत दुर्दशा, नील देवी, अंधेर नगरी, प्रेम योगिनी, विद्या सुंदर सती संताप, पाखंड विडंबन, धनंजय विजय, कपूर मंजरी, भारत जननी, मुद्राराक्षस, दुर्लभ बंधु।

निबंध संग्रह:-

नाटक, कालचक्र, भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है, कश्मीर कुसुम, जातीय संगीत, संगीत सार, हिंदी भाषा, स्वर्ग में विचार सभा।

निबंध:-

रामायण का समय, काशी, मणिकर्णिका, बादशाह दर्पण, उदयपुरोदय, संगीत सार, तटीय सर्वस्व, वैष्णवता और भारतवर्ष, सूर्योदय, ईश्वर बड़ा विलक्षण है, ग्रीष्म ऋतु, वर्षा काल, बद्रीनाथ की यात्रा, एक अद्भुत अपूर्व स्वप्न।

काव्य कृतियां:-

भक्त सर्वस्व, प्रेममालिका, कार्तिक स्नान, वैशाख महात्म्य, प्रेम सरोवर, जैन कुतूहल, प्रेम सतसई श्रिंगार, प्रेम माधुरी, प्रेम तरंग, उत्तरार्ध भक्तमाल, प्रेम विलाप, होली, मधु मुकुल, राग-संग्रह, वर्षा-विनोद, विनय प्रेम पचासा, फूलों का गुच्छा, प्रेम फुलवारी, कृष्ण चरित्र, प्रातः स्मरण, तन्मय लीला, दानलीला, संस्कृत लावणी, बसंत, मुख दिखावनी, उर्दू का स्यपा, बंदर सभा, बकरी विलाप, जातीय संगीत, रिपुनाष्टक।

निष्कर्ष

आज के लेख में हमने जाना कि Father of Hindi Subject कौन है और आधुनिक हिंदी भाषा के जनक कौन माने जाते हैं। हम आशा करते हैं कि आज का यह लेख आपके लिए काफी मददगार रहा होगा। यदि आप कोई सवाल पूछना चाहते हैं तो कमेंट बॉक्स में कमेंट कर सकते हैं।

FAQ

अंग्रेजी भाषा के जनक कौन है?

अंग्रेजी भाषा के पिता “जेफ्री चौसर” हैं, जेफ्री चौसर वास्तव में एक प्रसिद्ध दार्शनिक और लेखक थे। उनका जन्म वर्ष 1343 के आसपास इंग्लैंड के लंदन शहर में हुआ था। उनका परिवार समाज के उच्च वर्ग से था।

हिंदी खड़ी बोली के जनक कौन है?

भारतेंदु हिंदी में नाटक विधा तथा खड़ी बोली के जनक माने जाते हैं

भूगोल के जनक का क्या नाम है?

इरेटोस्थनीज वह एक प्राचीन यूनानी विद्वान थे जिन्हें ‘भूगोल का जनक’ कहा जाता है।

हिंदी के प्रथम पिता कौन है?

9 सितंबर को जन्में भारतेंदु हरिश्चंद्र हिंदी भाषा के जनक हैं। आधुनिक भारत में हरिश्चंद्र को हिंदी का जनक माना जाता है। हिन्दी के पितामह के कार्यों की प्रशंसा पूरे विश्व में की जाती है।