रावण के पिताजी का नाम क्या था? | ravan ke pita ka naam

रावण के पिताजी का नाम क्या था? | ravan ke pita ka naam

दोस्तों, रामायण महाकाव्य हम सभी के जीवन को एक नई दिशा देने का काम करता है, और इस महाकाव्य के सभी पात्रों से हम अपने जीवन में कुछ ना कुछ सीख सकते हैं. रामायण के सबसे ताकतवर तथा खूंखार राक्षस का नाम रावण था, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इतने खूंखार राक्षस को पैदा किसने किया था?

यदि आप नहीं जानते तो कोई बात नहीं क्योंकि आज के लेख में हम आपको बताएंगे कि रावण के पिताजी का नाम क्या था, तथा रावण के संबंध में हम आपको और भी कई ऐसी रोचक जानकारियां देंगे, जिनके बारे में शायद ही आपको पता होगा.

तो चलिए शुरू करते हैं-

रावण कौन था?

दोस्तों रावण, रामायण की महाकथा का एक पात्र है. रामायण में इसका योगदान एक राक्षस के तौर पर रहा है. प्राचीन काल में रावन लंका राज्य, जिसे आज श्रीलंका देश भी कहा जाता है, का राजा था. रावण को दशानन के नाम से भी जाना जाता था, दशानन का मतलब 10 मुख वाला होता है. ऐसा कहा जाता है कि रावण ने त्रिदेवों में से एक महान ब्रह्मा जी के लिए की गई तपस्या की सार्थकता हेतु यज्ञ किया था, जिसमें उन्होंने अपने सर को अपने ही खड़क से 10 बार काट कर के चढ़ाया था.

रावण शब्द का मतलब आदिवासी सभ्यता के अनुसार राजा होता है. रामायण महाकाव्य के दुर्दंत राक्षस के तौर पर और खलनायक के तौर पर रामायण में रावण का जिक्र आता है. रामायण के अनुसार कैकसी पुत्र दशानन रावन एक शिव भक्त, राजनीतिज्ञ, महा प्रतापी, महा पराक्रमी योद्धा, अत्यंत बलशाली, शास्त्रों और शस्त्रों का प्रखर ज्ञाता, प्रकांड विद्वान पंडित, महाज्ञानी और राक्षस था. उसका औरा उस समय अपने चरम पर था जब उसके पास में सोने की लंका थी जो उसे भगवान शिव से दक्षिणा के तौर पर मिली थी.

रावण के पिताजी का नाम क्या था?

दोस्तों, रावण के पिता का नाम विश्रवा था. सात अमर ऋषियों में से एक महान पुलस्त्य ऋषि के पुत्र का नाम विश्रवा था, तथा विश्रवा की दो पत्नियां की जिनका नाम वरवर्णिनी  उर्फ़ इलाविदा तथा कैकसी था. वरवर्णिनी  ने कुबेर को जन्म दिया था तथा कैकसी ने रावण को पैदा किया था. रावण के माता-पिता का नाम कैकसी तथा विश्रवा था.

रावण के परिवार में कौन कौन थे?

दोस्तों, रावण का परिवार अपने आप में काफी बड़ा था. हम सबसे पहले रामायण के सबसे बड़े खलनायक रावण के माता पिता के नाम से शुरु करते हैं.

महान ऋषि पुलस्त्य ऋषि की संतान विश्रवा थे तथा विश्रवा का पुत्र रावण था. अमर पुलस्त्य ऋषि रावन के दादाजी थे. विश्रवा की दो पत्नियां थी, जिसमें से एक ऋषि भारद्वाज की पुत्री थी जिसका नाम इलाविदा यानी कि वरवर्णिनी था, तथा वरवर्णिनी से उन्हें कुबेर पुत्र प्राप्त हुआ. लेकिन अपनी दूसरी पत्नी कैकसी से विश्रवा को रावण की प्राप्ति हुई थी. कुबेर और रावण आपस में भाई थे, लेकिन सगे भाई नहीं थे.

अब रावन ले भाई बहनों के बारे में जानते है. रावण के कुल मिलाकर के 6 भाई थे, जिसमें कुबेर, विभीषण, कुंभकरण, अहिरावण, खर, और दूषण, थे रावण के 2 बहने भी थी पहली का नाम कुम्भिनी और दूसरे का नाम शूर्पनखा था. कुम्भिनी मथुरा के राजा मधु राक्षस की पत्नी थी, और लवणासुर राक्षस की मां थी. इसके अलावा शूर्पनखा का विवाह है कालका के पुत्र विदयुविह्वा से कर दिया गया था.

अब हम रावण की पत्नियों के बारे में आपको बताते हैं. रावण की मूल रूप से दो पत्नियां थी, लेकिन कई बार रावण की तीन पत्नियां होने का जिक्र भी आता है. रावण की पहली पत्नी का नाम मंदोदरी था, जोकि मायासुर की पुत्री थी, दूसरी का नाम धन्यमालिनी था और तीसरी का नाम अभी उपलब्ध नहीं है.

अब हम आपको रावण के संतानों के बारे में बताते हैं. रावण और मंदोदरी से अक्षय कुमार, मेघनाथ, महोदर, प्रहस्त, विरुपाक्ष, भीकम वीर पैदा हुए थे. इसके अलावा धन्यमालिनी से उन्हें अधिक अतिक्या और त्रिशिरीर नामक के दो पुत्र हुए थे.

उनकी तीसरी पत्नी से उन्हें प्रहस्था, नरान्तका और देवताका नामक पुत्र प्राप्त हुए थे, रावण के दादा दादी का नाम पुलस्त्य ऋषि और हविर्भुवा था. इसके अलावा रावण के नाना नानी का नाम सुमाली और केतुमति था.

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रावण कैसा था?

दोस्तों, आपने बहुत बार सुना होगा कि रावण एक महाज्ञानी, पंडित, खतरनाक और समझदार व्यक्ति था. इसके अलावा भगवान शिव का भक्त भी था, तथा उसने मां सीता का अपहरण करने के बाद भी उनके साथ में कोई बुरा काम नहीं किया, और इसलिए कई लोग यह मानते हैं कि रावण एक बहुत ही अच्छा व्यक्ति था और दिल का साफ व्यक्ति था.

लेकिन सत्य इसके बिलकुल उलट है क्योंकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं था. रावण का जिक्र केवल रामायण में ही नहीं है, बल्कि और भी अन्य शास्त्रों में उपनिषदों जैसे पद्म पुराण, कूर्म पुराण, श्रीमद भागवतम में और अन्य कथाओं में भी उसका वर्णन आता है जिसमें बताया जाता है कि रावण कितना दुष्ट था.

बलात्कार करना, चोरी करना, डकैती करना, स्त्रियों को मारना, बच्चों को मारना, ब्राह्मणों को मार करके उनका खून पीना, भूख लगने पर अपने सामने आने वाली किसी भी इंसान या जानवर को खाजाना, देवताओं को अपना गुलाम बना कर रखना यह सब रावण की दिनचर्या में स्शामिल था.

वह राक्षस जो रावण को छोड़कर किसी अन्य दैत्य या देवता की पूजा करता था रावण उसे भी मौत के घाट उतार देता था, इसलिए यह कहना कि रावण अच्छा था या दिल का साफ था, सत्य से परे है. रावण एक अत्यंत भयानक, दुर्जन और खतरनाक राक्षस था, जो ब्राह्मण के घर में पैदा हुआ था.

उसने अपनी तपस्या से तथा अपने बाहुबल से विश्व की सभी शक्तियों को झुका दिया था, और अपने शरीर में अमृत का कलश धारण करके वह लगभग अमर बन चुका था. आज के समय राक्षसराज रावण को भारत में बहुत से स्थानों पर पूजा जाता है, लेकिन रावण बिल्कुल भी पूजनीय नहीं है.

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रावण के हथियार का नाम क्या है?

दोस्तों, आप ने रावण के चंद्रहास खड़क के बारे में सुना होगा जो उसे भगवान शिव से वरदान के तौर पर मिला था. लेकिन रावण के पास में केवल यह एक ही अस्त्र नहीं था. रावण के पास में दिव्यास्त्रों का पूरा जखीरा था. रावण के पास में इतने अस्त्र-शस्त्र थे जिसकी वजह से उसे हराना किसी भी हाल में असंभव था.

रावण के पास में अपनी ज्ञान, बुद्धि तथा बाहुबल के अलावा चंद्रहास खड़क, रूद्रकीर्तिमुख खड़क, सूर्य हास खड़क, मकरमुख, अशिविश्मुख, वाराह विमुख तथा ऐसे ही हजारों विध्वंसकारी अस्त्र और शस्त्र थे.

निष्कर्ष

आज के लेख में हमने जाना कि रावण के पिताजी का नाम क्या था. इसके अलावा हमने रावण के बारे में आपको और भी कई हैरतअंगेज जानकारियां  दी. हम आशा करते हैं कि आज का लेख आपके लिए काफी ज्ञानवर्धक रहा होगा. यदि आप कोई सवाल पूछना चाहते है तो आप हमें कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं.

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