पंचायती राज सिस्टम क्या है? | Panchayati Raj System Kya Hai?

पंचायती राज सिस्टम क्या है? | Panchayati Raj System Kya Hai?

दोस्तों, पंचायती राज सिस्टम हमारी देश की वह लोकतांत्रिक व्यवस्था है जो पूरे विश्व की सबसे बड़ी तथा व्यापक विकेंद्रीकृत लोकतांत्रिक व्यवस्था है। लेकिन आज भी कई लोग Panchayti Raj System से अनभिज्ञ हैं।

यदि आप भी पंचायती राज सिस्टम के बारे में जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं और Panchayti Raj System से जुड़े कुछ तथ्यों पर नजर डालना चाहते हैं, तो आप बिल्कुल सही जगह आये है।

क्योंकि आज हम आपको बताएंगे कि Panchayti Raj System की शुरुआत कब हुई, इसकी शुरुआत कैसे हुई, इसकी स्थापना कैसे हुई, Panchayti Raj System kya hai? पंचायती राज सिस्टम का महत्व क्या है? और पंचायती राज सिस्टम किस प्रकार आधुनिक भारत में उपयोगी है।  तो चलिए शुरू करते हैं

पंचायती राज सिस्टम क्या है? | Panchayati Raj System Kya Hai?

पंचायती राज सिस्टम एक प्रकार से भारत के ग्रामीण और अर्ध शहरी इलाकों में लोकतांत्रिक व्यवस्था को विकेंद्रीकृत करने का एक माध्यम है।

वैसे तो यह अपने आप में एक विकेंद्रीकृत व्यवस्था है, जिसके द्वारा अपने लोकल एजेंडा को पूरा करने के लिए या फिर लोकल स्तर पर सरकार चलाने के लिए लोग पंचायती राज सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं।

इसके अंतर्गत लोग अपने वोट के माध्यम से जिला स्तर पर, ब्लॉक स्तर पर या अन्य छोटे स्तर पर  लोगों का चुनाव करके उन्हें पंचायती राज सिस्टम का हिस्सा बनाते हैं।

जैसा कि हम जानते हैं कि हमारी पंचायती राज व्यवस्था त्रिस्तरीय है, जिसमें ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, और जिला परिषद मूल रूप से सक्रिय होते हैं।

ग्राम पंचायत का इस्तेमाल  गांव में किया जाता है। पंचायत समिति जिसे मंडल परिषद के नाम से भी जाना जाता है, उसे ब्लॉक लेवल पर इस्तेमाल किया जाता है, और जिला परिषद को जिले के स्तर पर इस्तेमाल किया जाता है।

भारत में लगभग सभी राज्यों में ऐसी व्यवस्थाएं विद्यमान है, जहां गांव में रहने वाले लोग अपने लेवल की सरकारी चुनते हैं, और उसी प्रकार लोकतांत्रिक व्यवस्था भारत के जड़ मूल तक पहुंच सकती है।

भारत में रहने वाले हर व्यक्ति तक  लोकतंत्र  का एहसास करवाना और लोकतंत्र की सेवाओं को पहुंचाना Panchayti Raj System का मुख्य उद्देश्य है।

पंचायती राज व्यवस्था की आवश्यकता | panchayati raj vyavastha kee aavashyakata

पंचायती राज सिस्टम क्या है? | Panchayati Raj System Kya Hai?

आप सोच रहे होंगे कि देश में एक सरकार होने पर क्या  वह देश की  सभी समस्याओं का निपटारा कर सकती है? यह सही भी है और गलत भी। क्योंकि देश की एक सरकार जिसे  लोकसभा में बैठने का मौका मिलता है, वह राष्ट्रीय स्तर पर बड़े मुद्दों को सुलझाने के काम करती है।

इसके पश्चात राज्य स्तर पर लोगों की समस्याओं को सुलझाने का काम राज्य सरकारी करती है, जिसके लिए विधानसभा और विधान परिषद का निर्माण भारत के संविधान के अंतर्गत किया गया है।

यह भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के विकेंद्रीकरण का अंश है। इसके पश्चात भारत के पंचायती राज व्यवस्था जो कि बलवंत राय मेहता समिति के द्वारा प्रस्तावित की गई थी, और सन 1992 में 73वें संविधान संशोधन के द्वारा इसे संवैधानिक रूप दिया गया। इसे आज के समय से  भारत के हर कोने में इंप्लीमेंट होते हुए देखा जा सकता है।

आज के समय भारत में Panchayti Raj System के कारण ही लोकतांत्रिक व्यवस्था पूर्ण रूप से विकेंद्रीकृत हो पाई है।

भारतीय लोकतंत्र अपनी शक्ति से भारत के हर व्यक्ति को  स्वतंत्रता  तथा  सभी मानवीय अधिकार गारंटी करता है। लोकतंत्र के विकेंद्रीकरण के लिए पंचायती राज व्यवस्था आवश्यक है।

पंचायत क्या होती है? | Panchayati raj kya hota hai

पंचायत शब्द का आशा एक ऐसी  सभा से होती है  जिसका प्रतिनिधित्व पांच अधिकारी करते हैं। उन अधिकारियों को पुराने समय में पंच के नाम से संबोधित किया जाता था।

उन पंचों को जनता के द्वारा चुना जाता था, और इसलिए उन्हें जनप्रतिनिधि भी कहा जाता था। इन पंचों के पास राजकीय, न्यायिक, कानून-व्यवस्था इन सब के अधिकार होते थे।

एक पंचायत के द्वारा  न्यायपालिका की तरह फैसला भी सुनाया जाता था। कार्यपालिका की तरह कार्य भी किए जाते थे, और राजकीय राज-व्यवस्था के तहत कानून-व्यवस्था का कार्यभार भी पंचायत अपने ग्राम स्थल परसंभालने का काम करती थी।

लेकिन बलवंत राय समिति ने पंचायत को पंचायती राज व्यवस्था में परिवर्तित कर दिया तथा इसे एक व्यवस्थित रूप में लागू करने के लिए सरकार को सुझाव दिए।

Panchayti Raj System की शुरुआत कब हुई

जैसा कि हम जानते हैं कि भारत के राजस्थान राज्य में गावों की एक बड़ी आबादी रहती है। पूरे राजस्थान राज्य में आपको हजारों गांव मिल सकते हैं,  जिनकी आबादी करोड़ों में होती है।

पंचायती राज व्यवस्था की शुरुआत राजस्थान के नागौर जिले से ही हुई थी। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने पंचायती राज व्यवस्था को संवैधानिक रूप देने के पश्चात 2 अक्टूबर 1969 को राजस्थान के नागौर जिले में पंचायती राज व्यवस्था की शुरुआत की।

राजस्थान पंचायत समिति और जिला परिषद एक्ट  1959  के तहत  राजस्थान में पंचायती राज समिति के चुनाव पहली बार कंडक्ट किए गए।

बलवंत राय मेहता समिति

बलवंत राय मेहता समिति या बलवंत राय मेहता कमेटी भारत सरकार के द्वारा 16 जनवरी 1957  कोई बनाई गई थी। इसका उद्देश्य उस समय कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोग्राम को एग्जामिन करना और लोगों को बेहतर लोकतान्त्रिक अधिकार दिलाने के लिए सुझाव देना था।

बलवंत राय मेहता समिति के चेयरमैन का नाम बलवंत राय मेहता था, और  बलवंत राय मेहता ने 24 नवंबर 1957 को अपनी रिपोर्ट सबमिट की।

जिसमें उन्होंने डेमोक्रेटिक डिसेंट्रलाइजेशन को पंचायती राज का नाम दिया, और पंचायती राज व्यवस्था को पूरे भारत में स्थापित करने के कुछ बड़े गंभीर सुझाव दिए।

पंचायती राज व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य लोकल स्तर पर उपजे हुए समस्याओं का निपटारा लोकल स्तर पर ही करना था।

यानी कि लोग अपनी समस्याओं का निपटारा स्वयं कर सके और इसके लिए सरकार उन्हें लोकतांत्रिक शक्तियों के साथ-साथ सरकारी शक्तियां भी उपलब्ध करवाती है।

निष्कर्ष

आज के लेख में हमने आपको Panchayti Raj System के बारे में सारी जानकारी प्रदान की है। इसके अलावा हमने आपको बताया Panchayti Raj System की शुरुआत कब हुई।

हम आशा करते हैं कि पंचायती राज व्यवस्था से जुड़े सभी सवालों के जवाब आपको इस लेख में मिल गए होंगे। यदि आपके मन में कोई सवाल हो तो आप हमसे कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट कर के पूछ सकते हैं।

FAQ

पंचायती राज के उद्देश्य क्या हैं?

भारत के संविधान द्वारा परिकल्पित पंचायती राज व्यवस्था के दोहरे उद्देश्य स्थानीय आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना है।

पंचायती राज की स्थापना कब हुई?

संविधान संशोधन विधेयक को संसद में पारित कराने के कई प्रयासों के बाद, संविधान (73वां संशोधन) अधिनियम, 1992 आखिरकार पारित हुआ और 24 अप्रैल, 1993 को लागू हुआ।

पंचायत कितने प्रकार के होते है?

वर्ष 1993 में 73वें और 74वें संवैधानिक संशोधनों के माध्यम से भारत में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था को संवैधानिक दर्जा प्राप्त हुआ। त्रिस्तरीय पंचायती राज प्रणाली में ग्राम पंचायत (ग्राम स्तर पर), पंचायत समिति (मध्य स्तर पर) और जिला परिषद (जिला स्तर पर) शामिल हैं।