भारत का राष्ट्रीय पेड़ कौन सा है? फल, उपयोग, और फायदे

भारत का राष्ट्रीय पेड़ कौन सा है? फल, उपयोग, और फायदे

 दोस्तों, भारत की कई राष्ट्रीय निशानियां है जिनमें भारत की राष्ट्रीय मुद्रा, भारत की राष्ट्रीय नदी, राष्ट्रीय पशु, राष्ट्रीय फूल, राष्ट्रीय सब्जी, राष्ट्रीय ध्वज इत्यादि शामिल है। लेकिन भारत का राष्ट्रीय पेड़ अपने आप में पूरे भारतीयों को गर्व की अनुभूति कराता है।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि bharat ka rashtriya ped kaun sa hai ? यदि आप नहीं जानते तो कोई बात नहीं। क्यूंकि आज हम आपको बताएंगे कि Bharat ka rashtriya ped kaunsa hai, उसके लिए उपयुक्त जलवायु कौन सी है? तथा भारत के राष्ट्रीय पेड़ के क्या फायदे हैं। तो चलिए शुरू करते हैं-

भारत का राष्ट्रीय पेड़ कौन सा है? | Bharat ka rashtriya ped kaunsa hai?

दोस्तों, बरगद (Banyan) के वृक्ष को भारत का राष्ट्रीय पेड़ भी कहा जाता है। बरगद को वटवृक्ष के नाम से भी जाना जाता है। जैसा कि आप जानते हैं कि भारतीय महापुराणों में वट वृक्ष का वर्णन काफी बार आता है।

यह मूल रूप से एक द्विबीजपत्री समपुष्पक पेड़ है, जिसकी जड़ें आमतौर पर तनों की सहायता से नीचे लटकती दिखाई देती है, साथ ही इसकी जड़ें जमीन के नीचे भी पाई जाती है।

एक तरीके से हम यह भी कह सकते हैं कि इसकी जड़े इसके तनों से लटकती हुई दिखाई देती है। यह एक विशालकाय वृक्ष होता है, और इसका तन्हा कभी भी मुड़ा हुआ नहीं होता है।

यह बिल्कुल सीधा और कठोर तना वाला पेड़ होता है। यह पेड़ अपनी शाखाओं से अपनी जड़ों को नीचे ले जाती है तथा इसकी जड़ें कई बार इसकी शाखाओं से लटकती हुई जमीन में वापस घुस जाती है। यह एक प्रकार से दिखने में मायाजाल जैसा दिखता है।

इसका फल काफी छोटा होता है और गोलाकार तथा लाल रंग का होता है, जिसे अंजीर के नाम से जाना जाता है। इसमें बारीक-बारीक बीज पाए जाते हैं। इसकी पत्तियां मूल रूप से चौड़ी और लगभग अंडाकार जैसी होती है।

हालांकि इसकी पत्तियों को तोड़ने से कई बार दूध जैसा कुछ निकलता है। इस वृक्ष की आयु तकरीबन 500 से 800 वर्ष की होती है। और इसका सबसे बड़ा वृक्ष तकरीबन 19,107 स्क्वायर मीटर में फैला हुआ लिखा गया है।

बरगद का फल (अंजीर)

Bharat ka rashtriya ped kaunsa hai?

बरगद का फल आम तौर पर लोग शौक से खाते हैं। बरगद के फल का नाम अंजीर होता है। इसका फल खाने में खट्टा-मीठा (पकने के बाद ज्यादा मीठा, कच्चा ज्यादा खट्टा) होता है, और स्वादिष्ट भी होता है।

वे लोग जो बरगद के गुणों को जानते हैं, वह इसके फल की दवाई भी बनाते हैं। जानवरों में बंदर इसके फलों को खाना ज्यादा पसंद करते हैं। गिलहरी, चीटियां, तोते यह भी वटवृक्ष के फलों को खाने में काफी उतावले नजर आते हैं।

भारत में बच्चे बरगद के फल अर्थात अंजीर को बड़े चाव से खाते हैं। क्योंकि यह इतना मीठा होता है कि इसमें से इसके मीठे का रसकई बार रिसता हुआ भी नजर आता है। अंजीर पक जाने के बाद में लगभग सभी जीव इसे खाने के लिए आतुर होते हैं। अंजीर  में बड़ी ही मनमोहक खुशबू आती  है।

बरगद का वैज्ञानिक नाम | bargad ka vaigyanik naam kya hai 

बरगद का वैज्ञानिक नाम Ficus Benghalensis होता है, और अंग्रेजी में इसे Banyan नाम से जाना जाता है। हालांकि बरगद जैसे महान व्यक्ति धरती पर कुछ ही मात्रा में पाए जाते हैं। वैसे तो लगभग सभी वृक्ष के अपने गुण होते हैं और सभी वृक्ष अपनी तरफ से महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

लेकिन बरगद का योगदान अतुलनीय है। हिंदू धर्म ग्रंथों में बरगद के वृक्ष को वटवृक्ष की उपाधि दी गई है, और वट वृक्ष में ब्रह्मा विष्णु महेश तीनों विराजमान होते हैं।

यह माना जाता है कई बार वट वृक्ष को भगवान शिव का रूप भी माना जाता है। अनेक व्रत में त्योहारों में वट वृक्ष की पूजा की जाती है। आमतौर पर बरगद के वृक्ष को काटा नहीं जाता बरगद के वृक्ष को काटना अपशकुन माना जाता है।

बरगद के पेड़ के लिए जलवायु

आपने देखा होगा कि कई बार बरगद का पेड़ और पीपल का पेड़ लोगों के घरों की दीवारों पर उग जाते हैं। यह नाली के पास उग जाते हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि यह तो किसी भी परिस्थिति में उग जाते हैं तो यह गलत है। इन्हें उगने के लिए एक निश्चित जलवायु की आवश्यकता होती है।

बरगद का पेड़ जब छोटा होता है तब इसके बीज को पौधा बनने के लिए भरपूर मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। इसके पश्चात जब यह पौधा बन जाता है, तब इसे गर्म जलवायु की आवश्यकता होती है।

उष्णकटिबंधीय जलवायु में बरगद का वृक्ष बड़ा होने लगता है, और जब एक बार यह बड़ा होने लगता है तब इसे किसी भी प्रकार की जलवायु महान वृक्ष बनने से रोक नहीं सकती। इसे रोकने का बस एक मात्र उपाय से काटना होता है।

बरगद का पेड़ अपने आप में तकरीबन 20 से 30 वर्षों में एक महान वृक्ष बन जाता है, इसके पश्चात यह तकरीबन 500 से लेकर 800 वर्ष तक लगातार अपनी छांव प्रदान करता है, जिसके पश्चात यह एक ठूंठ बन जाता है, अर्थात यह वृक्ष समाप्त हो जाता है।

लेकिन जब तक यह वृक्ष से समाप्त होता है तब तक अपने ही जैसे लाखों पेड़ों को जन्म दे चुका होता है। एक अंजीर में तकरीबन 100 से ज्यादा बीज होते हैं, और एक बरगद पर एक बार में 10,000 से ज्यादा अंजीर लगते हैं।

बरगद के फायदे | बरगद के उपयोग | bargad ke fayde in hindi

बरगद वृक्ष के कई फायदे होते हैं जो हमने आपको नीचे बताये है-

  • बरगद के फल, जिन्हें अंजीर के नाम से जाना जाता है, वह बच्चों के और बड़ों के सबसे पसंदीदा फलों में गिने जाते हैं।
  • बरगद के तनी का उपयोग इसके जड़ का इसकी पत्तियों का इसके फल व छाल का उपयोग आमतौर पर दांत में मसूड़ों को स्वस्थ रखने में किया जाता है।
  • इसका उपयोग सूजन घटाने में भी किया जाता है।
  • एंटीऑक्सीडेंट के रूप में इसका इस्तेमाल किया जाता है।
  • एंटीमाइक्रोबियल के रूप में इसका इस्तेमाल किया जाता है।
  • इसकी जड़ को चबाकर उसका इस्तेमाल मंजन की तरह किया जाता है।
  • बरगद के फल इसकी पत्तियां तथा इसकी जड़ का रस शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता में भयंकर सुधार करता है।
  • आपको मौसमी बीमारी होना बंद हो जाती है।
  • यदि आपको बवासीर की बीमारी है तो इसके लिए बरगद के पेड़ से निकलने वाले दूध का इस्तेमाल आप अपनी बवासीर की बीमारी को दूर करने में कर सकते हैं। हालांकि बरगद के दूध का इस्तेमाल करने से पहले आयुर्वेदिक डॉक्टर का परामर्श लेना आवश्यक है।
  • यदि आप किसी भी प्रकार से डायबिटीज के मरीज है तो आपकी डायबिटीज की बीमारी को दूर करने में बरगद के पेड़ की जड़ इस्तेमाल की जा सकती है।
  • बरगद के पेड़ की जड़ में मूल रूप से हाइपोग्लाइसेमिक नमक तत्व पाया जाता है, जो शरीर में शुगर कम करने का काम करता है। इसलिए कई बार डॉक्टर भी बरगद के पेड़ की जड़ को पानी में उबालकर उसके पानी को पीने की सलाह देते हैं।
  • इस बात के प्रमाणिक साक्ष्य हैं कि यदि आप बरगद के पेड़ के नीचे बैठते हैं तो आप डिप्रेशन से दूर हो सकते हैं।
  • यदि आप डायरिया से परेशान हैं तो बरगदसे निकलने वाली दूध का इस्तेमाल डायरिया और बवासीर जैसी बीमारी को दूर करने में किया जा सकता है।
  • बांझपन और नपुंसकता जैसी भयानक समस्या को दूर करने में बरगद का पेड़ लाभदायक होता है। बरगद के फल को खाने से अर्थात अंजीर को खाने से पुरुषों में शुक्राणुओं की मात्रा बढ़ जाती है।
  • महिलाओं को यौन संबंधी विकारों को दूर करने में मदद मिलती है।
  • आमतौर पर महिलाओं को उनके यौन संबंधी बीमारियों को दूर करने में वर्ग से निकलने वाला दूध फायदेमंद होता है, लेकिन इसके लिए आयुर्वेदिक डॉक्टर की परामर्श आवश्यक है।
  • बरगद के पेड़ की पत्तियां जोड़ों के दर्द को दूर करने में सहायक होती है।

यह सारे फायदेबरगद के वृक्ष के हैं। इन सबके अलावा भी तकरीबन एक हजार से अधिक फायदे बरगद के वृक्ष के द्वारा हमें प्राप्त हो सकते हैं। लेकिन यदि हम केवल आपको इसके फायदे बताएंगे तो आपको पढ़ने में 5 से 6 दिन लग जाएंगे।

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निष्कर्ष

आज के लेख में हमने जाना कि Bharat ka rashtriya ped kaunsa hai? इसके अलावा हमने यह जाना कि बरगद के पेड़ का वैज्ञानिक नाम क्या है? इसके अतिरिक्त हमने जाना की बरगद के पेड़ के लिए किस प्रकार की जलवायु की आवश्यकता होती है।

हम आशा करते हैं कि आज का यह लेख आपको काफी पसंद आया होगा। यदि आपके मन में इस लेख से सबंधित कोई प्रश्न है तो आप हमसे कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट कर के पूछ सकते हैं।

FAQ

भारत का राष्ट्रीय वृक्ष कब घोषित किया गया?

1950 में भारत सरकार ने बरगद के पेड़ की उपयोगिता, विशालता और वैज्ञानिक महत्व के साथ-साथ पौराणिक महत्व को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार द्वारा इसे राष्ट्रीय वृक्ष घोषित किया। बरगद के पेड़ को बट का पेड़ या बरगद का पेड़ भी कहा जाता है।

उत्तर प्रदेश का राष्ट्रीय पेड़ क्या है?

उत्तर प्रदेश का राष्ट्रीय वृक्ष क्या है उत्तर प्रदेश का राजकीय अशोक है जिसे यहां की स्थानीय भाषा में सीता “अशोक” कहा जाता है।

बरगद का दूसरा नाम क्या है?

बरगद बहुवर्षीय विशाल वृक्ष है। इसे ‘वट’ और ‘बड़’ भी कहते हैं। यह एक स्थलीय द्विबीजपत्री एंव सपुष्पक वृक्ष है।

बरगद की जड़ से क्या फायदा?

बरगद के पेड़ की जड़ कर्ज मुक्ति का मुख्य उपाय है। इसे धारण करने से कर्ज से शीघ्र मुक्ति मिलती है। बरगद के पेड़ की जड़ को धारण करने से महिलाओं में रक्त संबंधी अनियमितताएं दूर होती हैं। देवताओं में बरगद के वृक्ष में ब्रह्मा का वास माना जाता है, इसलिए ब्रह्मा की कृपा भी प्राप्त होती है।

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